विस्तृत उत्तर
ब्रह्मशिरास्त्र (या ब्रह्मशीर्षास्त्र) ब्रह्मास्त्र का एक अत्यंत विकसित और अधिक शक्तिशाली रूप है।
ब्रह्मशिरास्त्र क्या है — 'ब्रह्मशिर' = ब्रह्मा के शीर्ष (सिर/मुख)। यह अस्त्र भगवान ब्रह्मा के चारों मुखों की शक्ति का प्रतीक है। इस प्रकार यह ब्रह्मास्त्र से चार गुणा अधिक शक्तिशाली था।
शक्ति — ब्रह्मशिरास्त्र इतना सटीक था कि इससे वन के बीच केवल एक घास को भी अलग नष्ट किया जा सकता था। साथ ही यह इतना विनाशकारी भी था कि इसके प्रभाव से पूरे विश्व का नाश हो सकता था।
धारक — पुराण और महाकाव्यों में महर्षि अग्निवेश के पास इसके होने का निर्विवाद उल्लेख है। कुछ विद्वानों के अनुसार द्रोणाचार्य, अर्जुन और अश्वत्थामा के पास भी यह अस्त्र था। महाभारत के अंत में अश्वत्थामा और अर्जुन के अंतिम युद्ध में जो अस्त्र चले उन्हें कुछ स्थानों पर ब्रह्मशिरास्त्र भी कहा गया है।
आधुनिक तुलना — यदि ब्रह्मास्त्र परमाणु बम के समान था तो ब्रह्मशिरास्त्र हाइड्रोजन बम के समान शक्तिशाली माना जाता है।





