रामचरितमानस — बालकाण्ड'ढोल गँवार शूद्र पशु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी' — यह चौपाई बालकाण्ड में है या नहीं?नहीं — बालकाण्ड में नहीं, सुन्दरकाण्ड में है। समुद्र के वचन हैं, भगवान या तुलसीदासजी के नहीं। सन्दर्भ समझना आवश्यक।#बालकाण्ड#ढोल गँवार#स्पष्टीकरण
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी ने जाते समय क्या कहा?पुलकित-प्रफुल्लित होकर स्तुति — 'जय रघुबंस बनज बन भानू।' वैष्णव धनुष रामजी को दिया, प्रणाम किया और प्रसन्नतापूर्वक तपोवन चले गये। सभा में आनन्द छा गया।#बालकाण्ड#परशुराम विदा#राम स्तुति
रामचरितमानस — बालकाण्डविवाह के समय कौन-कौन से वाद्ययन्त्र बजे?अनेक प्रकार के — 'बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना' — आकाश में देवताओं के नगाड़े, अप्सराओं का नृत्य-गान, किन्नरों के गीत। पृथ्वी पर शहनाई, ढोल, मंगलवाद्य। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द।#बालकाण्ड#वाद्य#विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने जयमाला पहनाते समय कैसा अनुभव किया?सकुचाहट + प्रेम + आनन्द — गुरुजनों की लाज से सकुचाईं पर धीरज धरा। मन में कहा — 'तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चित राचा' — मेरा प्रण सच्चा है, चित्त रघुपति के चरणों में अनुरक्त है।#बालकाण्ड#सीता भाव#जयमाला
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।#बालकाण्ड#जनकपुर#नगर वर्णन
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।#बालकाण्ड#राम लक्ष्मण#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी ने जन्म लेते समय कौन सा रूप दिखाया?पहले चतुर्भुज विष्णु रूप दिखाया। माता कौशल्या ने कहा — 'यह रूप छोड़कर बाललीला करो।' भगवान बालक रूप होकर रोने लगे। 'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।'#बालकाण्ड#चतुर्भुज रूप#राम प्राकट्य
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी के जन्म के समय कौन सा नक्षत्र/मुहूर्त था?अभिजित् मुहूर्त — भगवान का प्रिय, दिन का सबसे शुभ मुहूर्त, मध्याह्न (दोपहर) के समय। 'सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता' — न सर्दी न गर्मी, सब लोकों को शान्ति देने वाला पवित्र काल।#बालकाण्ड#अभिजित मुहूर्त#राम जन्म
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी का जन्म किस मास, पक्ष और तिथि को हुआ?चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि (रामनवमी), अभिजित् मुहूर्त, मध्य दिवस। योग, लग्न, ग्रह, वार, तिथि सब अनुकूल।#बालकाण्ड#राम जन्म तिथि#चैत्र नवमी
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने विवाह के समय कौन सा रूप धारण किया?शिवजी ने विवाह मण्डप में अत्यन्त सुन्दर और दिव्य रूप धारण किया। पहले बारात में विचित्र भयानक रूप था, पर विवाह के समय मनोहर रूप देखकर सब प्रसन्न और मोहित हो गये।#बालकाण्ड#शिव सुन्दर रूप#विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्डसतीजी द्वारा सीता रूप धारण करने के बाद शिवजी ने क्या निर्णय लिया?शिवजी ने मन-ही-मन सतीजी का पत्नी रूप में त्याग करने का संकल्प किया — 'एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं।' कारण — सतीजी ने सीता रूप धारा, अतः शिवजी की दृष्टि में वे माता समान हो गयीं। प्रकट में कुछ नहीं कहा पर हृदय में बड़ा सन्ताप था।#बालकाण्ड#शिव त्याग#सती
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस की रचना किस तिथि को पूरी हुई?संवत् 1633 (1576 ई.) मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम विवाह के दिन पूरी हुई। आरम्भ रामनवमी (जन्म) के दिन और समाप्ति राम विवाह के दिन — कुल 2 वर्ष 7 माह 26 दिन।#बालकाण्ड#रचना समाप्ति#संवत 1633
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस को पूरा होने में कितना समय लगा?2 वर्ष 7 महीने 26 दिन। आरम्भ — संवत् 1631 चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी) अयोध्या में। समाप्ति — संवत् 1633 मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष, राम विवाह के दिन। अन्त में काशी में भगवान विश्वनाथ के समक्ष समर्पित किया गया।#बालकाण्ड#रचना काल#तुलसीदास
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस की रचना किस तिथि को शुरू हुई?चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी), मंगलवार को। तुलसीदासजी ने लिखा — 'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' यह वही तिथि है जिस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था।#बालकाण्ड#रचना तिथि#रामनवमी
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरीं द्वार' — इसमें राम नाम की तुलना किससे है?राम नाम की तुलना मणि-दीपक से की गई है। अर्थ — यदि भीतर-बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो मुखरूपी द्वार की जीभरूपी देहली पर रामनामरूपी मणि-दीपक रख दो।#बालकाण्ड#राम नाम#मणि दीपक