रामचरितमानस — बालकाण्ड'मंगल करनि कलि मल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की' — इसका अर्थ?रघुनाथजी की कथा = मंगलकारी + कलियुग के पाप नष्ट करने वाली। बालकाण्ड समापन का छन्द। रामकथा ही कलियुग का सबसे बड़ा साधन।#बालकाण्ड#मंगल करनि#रघुनाथ कथा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — इसका अर्थ?अर्थ — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया। भक्त-प्रेम ही अवतार का मूल कारण।#बालकाण्ड#भगत हेतु#राम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा' — अर्थ?जो राम ने रचा वही होगा, तर्क से क्या? शिवजी ने सतीजी को कहा। शिक्षा — ईश्वर की योजना सर्वोपरि।#बालकाण्ड#राम रचि राखा#भाग्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी' — किसने कहा और अर्थ?तुलसीदासजी — मंगलाचरण। सम्पूर्ण जगत सीताराममय जानकर प्रणाम। सबसे प्रसिद्ध दोहा।#बालकाण्ड#सीय राममय#तुलसीदास
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#चारों विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भरे भुवन घोर कठोर रव रबि बाजि तजि मारगु चले' — इसका अर्थ?अर्थ — भयंकर कठोर ध्वनि से सब लोक भरे, सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़ भटके, दिग्गज चिंघाड़े, पृथ्वी डोली, शेष-वाराह-कच्छप कलमलाये। धनुष भंग की ध्वनि से सारी सृष्टि काँप उठी।#बालकाण्ड#छन्द अर्थ#धनुष भंग ध्वनि
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।#बालकाण्ड#छन्द अर्थ#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड'संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु' — इस सोरठा का क्या अर्थ है?शिव धनुष = जहाज, राम बाहुबल = समुद्र। जैसे समुद्र में जहाज डूबे, वैसे राम के बल से धनुष टूटा और मोहवश चढ़े राजाओं का अभिमान डूबा। सुन्दर रूपक — तीन तुलनाएँ एक सोरठा में।#बालकाण्ड#सोरठा अर्थ#धनुष जहाज
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा' — इसका अर्थ?अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ उठाने लगे पर धनुष टस-से-मस नहीं हुआ। शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य कि कोई हिला तक नहीं सका। इसके बाद जनक ने निराश वाणी कही।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#दस हज़ार राजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कोउ कह जौं ए बर बरैं तौ सखि कहा बुझाइ' — इसका अर्थ?जनकपुर की स्त्रियों का संवाद — यदि विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही वर मिलेगा, सन्देह नहीं। यदि ऐसा संयोग बने तो सब कृतार्थ होंगे — सखी कहती हैं 'ये ससुराल यहाँ आयें' इसकी आतुरता है।#बालकाण्ड#जनकपुर स्त्रियाँ#सखी संवाद
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।#बालकाण्ड#दशरथ वचन#चौपाई अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम' नाम का अर्थ वसिष्ठजी ने क्या बताया?'राम' = जो सबके हृदय में रमण करते हैं, आनन्दस्वरूप। 'र' 'आ' 'म' — अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा का बीज। ब्रह्मा, विष्णु, शिव स्वरूप। वेदों का प्राण, निर्गुण, अनुपम, गुणनिधान।#बालकाण्ड#राम नाम अर्थ#वसिष्ठ
रामचरितमानस — बालकाण्डगुरु वसिष्ठजी ने चारों पुत्रों का नाम कैसे रखा — क्या अर्थ बताया?राम — सबके हृदय में रमण करने वाले, आनन्दस्वरूप। भरत — विश्व का भरण करने वाले। लक्ष्मण — लक्ष्मी के मनरूप, शेषजी के अवतार। शत्रुघ्न — शत्रुओं का नाश करने वाले। गुरु वसिष्ठजी ने गुण-अर्थ अनुसार नाम रखे।#बालकाण्ड#वसिष्ठ#नामकरण अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — इसका अर्थ?अर्थ — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिये भगवान ने मनुष्य अवतार लिया। उनका शरीर माया-गुणों से परे, स्वेच्छा से निर्मित है।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#मनुज अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।#बालकाण्ड#हरि शब्द#दोहरा अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#अवतार उद्देश्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।#बालकाण्ड#धर्म हानि#अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य — विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गयी। कामदेव के प्रभाव से सृष्टि का सारा विवेक और संयम नष्ट हो गया। केवल शिवजी अप्रभावित रहे।#बालकाण्ड#कामदेव#विवेक सेना
रामचरितमानस — बालकाण्ड'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#तपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।#बालकाण्ड#योगाग्नि#अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि' — इस सोरठा का क्या अर्थ है?अर्थ — प्रेम की सुन्दर रीति देखो कि जल भी दूध के साथ मिलकर दूध के भाव बिकता है। लेकिन कपटरूपी खटाई पड़ते ही दूध फट जाता है और पानी अलग हो जाता है। तात्पर्य — सतीजी के कपट (सीता रूप) ने शिवजी के प्रेम-बन्धन को तोड़ दिया।#बालकाण्ड#सोरठा#प्रीति रीति
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए' — इसका क्या मतलब है?अर्थ — हर कल्प (ब्रह्मा के दिन) में भगवान की लीला भिन्न होती है, इसलिये मुनियों ने अनेक प्रकार से हरिचरित गाये हैं। इसमें संदेह न करें, प्रेमसे सुनें। वाल्मीकि, तुलसी आदि की रामकथाओं में अन्तर इसी कल्पभेद के कारण है।#बालकाण्ड#कल्पभेद#हरिचरित
रामचरितमानस — बालकाण्ड'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — इसका नाम 'रामचरितमानस' है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति (विश्राम) मिलती है। विषय-तापसे जलता मनरूपी हाथी इस मानसरूपी सरोवर में आकर सुखी हो जाता है।#बालकाण्ड#मानस नामकरण#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र (रामचरितमानस) प्रकाशित हुआ। यही रामनवमी का दिन है जब भगवान राम का जन्म हुआ था।#बालकाण्ड#रचना तिथि#अयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में 'मानस' शब्द का क्या अर्थ बताया गया है?'मानस' के दो अर्थ हैं — (1) मन — शिवजी ने इस कथा को अपने मन में रचकर रखा था, (2) सरोवर — रामचरित का पवित्र मानसरोवर। शिवजी ने प्रसन्न होकर इसका नाम 'रामचरितमानस' रखा।#बालकाण्ड#मानस अर्थ#नामकरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — निर्गुण (निराकार) और सगुण (साकार) दोनों ब्रह्म के ही स्वरूप हैं। दोनों अकथनीय, अगाध, अनादि और अनुपम हैं। तुलसीदासजी ने दोनों को एक ही ब्रह्म के दो पहलू बताकर निर्गुण-सगुण विवाद का समाधान किया।#बालकाण्ड#निर्गुण सगुण#ब्रह्म
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने सत्संग की महिमा में क्या कहा — 'बिनु सत्संग विवेक न होई' का क्या अर्थ है?अर्थ — सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम की कृपा के बिना सत्संग सहज में नहीं मिलता। सत्संगति आनन्द और कल्याण की जड़ है — सत्संग की प्राप्ति ही फल है और बाकी सब साधन फूल हैं।#बालकाण्ड#सत्संग#विवेक
रामचरितमानस — बालकाण्ड'श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — श्रीगुरु के चरण-नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश समान है, जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। यह प्रकाश अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करता है और जिसके हृदय में आ जाये उसके बड़े भाग्य हैं।#बालकाण्ड#गुरु वन्दना#चौपाई