रामचरितमानस — बालकाण्डदशरथ की बारात कैसी थी — जनकपुर कैसे पहुँची?
अत्यन्त भव्य बारात — वसिष्ठजी, मुनि, ब्राह्मण, सेना, हाथी-घोड़े-रथ सजे-धजे। नगाड़े-मंगलगान। शिवजी ने देवताओं को समझाया, नन्दी आगे बढ़ाया। दशरथ प्रसन्न-पुलकित। शिवजी रामरूप देख-देख सजल नेत्र हुए।
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