विस्तृत उत्तर
विवाह सम्पन्न होने और दहेज-विदाई के बाद बारात अत्यन्त भव्यता से अयोध्या लौटी।
जनक ने अपार दहेज दिया — दासी, दास, हाथी, घोड़े, रथ, गायें, वस्त्र, मणि, सोने के बर्तन — जिनका वर्णन नहीं हो सकता। विदाई के समय सबकी आँखों में आँसू थे।
बारात के अयोध्या पहुँचने पर नगर में अपार आनन्द मना — 'नगर नारि नर रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी' — नगर की स्त्री-पुरुष (बहुओं का) रूप देखकर नेत्रोंका फल पाकर सुखी हो रहे हैं।
इसके बाद बालकाण्ड का अन्तिम भाग आता है जिसमें रामचरित की महिमा कही गयी है।





