विस्तृत उत्तर
इस सोरठा का अर्थ — शिवजीका धनुष जहाज है और श्रीरामचन्द्रजीकी भुजाओंका बल समुद्र है। (धनुष टूटनेसे) वह सारा समाज डूब गया, जो मोहवश पहले इस जहाजपर चढ़ा था।
पूरी सोरठा — 'संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु। बूड़ सो सकल समाजु चढ़ा जो प्रथमहिं मोह बस॥'
इसमें सुन्दर रूपक है:
- ▸शिवजी का धनुष = जहाज (जिसपर राजा सवार थे)
- ▸रामजी का बाहुबल = समुद्र (जिसमें जहाज डूबा)
- ▸राजाओं का समाज = यात्री (जो मोहवश जहाज पर चढ़े थे)
जैसे समुद्र में जहाज डूब जाता है, वैसे ही रामजी के बाहुबलरूपी समुद्र में शिवधनुषरूपी जहाज टूट गया और उसपर सवार राजाओं का अभिमान डूब गया।





