विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी ने जन्म लेते समय सबसे पहले चतुर्भुज (चार भुजाओं वाला) दिव्य विष्णु-रूप दिखाया। माता कौशल्या ने जब ज्ञान उत्पन्न होने पर भगवान को पहचाना, तब प्रभु मुसकुराये।
फिर माता ने प्रार्थना की — 'तजहु तात यह रूपा। कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा॥' — हे तात! यह रूप छोड़कर बाललीला करो।
माता का वचन सुनकर भगवान बालक रूप होकर रोने लगे।
दोहा — 'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार॥' — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिये भगवान ने मनुष्य अवतार लिया।





