लोकस्वर्लोक कितने समय तक रहा जा सकता है?स्वर्लोक में जितने पुण्य उतने समय। गीता (9.21) कहती है — पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर लौटना पड़ता है। यह अस्थायी निवास है।#स्वर्लोक#समय#पुण्य
लोकमृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।#मृत्यु#भगवान नाम#पाप नाश
लोकभीष्म पितामह की मृत्यु के समय भुवर्लोक के निवासियों ने क्या किया?भीष्म पितामह के देह त्याग के समय भुवर्लोक के सिद्ध, चारण और विद्याधर वहाँ एकत्रित हुए और अंतरिक्ष से पुष्पों की भारी वर्षा की।#भीष्म पितामह#भुवर्लोक#सिद्ध
लोकवारुणी देवी समुद्र मंथन से किसे मिली?वारुणी देवी समुद्र मंथन से निकलीं और असुरों ने उन्हें ग्रहण किया।#वारुणी#असुर#समुद्र मंथन
लोकमंदराचल पर्वत मंथन के समय क्यों डूबने लगा?आधार न होने के कारण भारी मंदराचल समुद्र में डूबने लगा, तब विष्णु ने कूर्मावतार लिया।#मंदराचल डूबना#कूर्मावतार#समुद्र मंथन
लोकभगवान विष्णु ने अपने द्वारपालों को क्यों नहीं बचाया?विष्णु ने श्राप को अपनी लीला मानकर रोका नहीं, बल्कि जय-विजय को शीघ्र मुक्ति का मार्ग दिया।#भगवान विष्णु#जय विजय#श्राप
लोकवैकुण्ठ के द्वारपाल जय विजय की कथाजय-विजय वैकुण्ठ द्वारपाल थे, जिन्हें श्राप से तीन असुर जन्म लेने पड़े।#वैकुण्ठ#द्वारपाल#जय विजय
लोकविष्णु के द्वारपालों को श्राप क्यों मिला?सनकादिक मुनियों को रोकने के कारण विष्णु के द्वारपालों को श्राप मिला।#विष्णु द्वारपाल#श्राप#सनकादिक
लोकरावण विष्णु का द्वारपाल था क्या?हाँ, कथा के अनुसार रावण भगवान विष्णु के द्वारपाल जय का जन्म था।#रावण#विष्णु द्वारपाल#जय विजय
लोकसृष्टि बनते समय वैकुण्ठ की भूमिका क्या थी?वैकुण्ठ ने नई सृष्टि को अपनी दिव्य आधारशक्ति से जोड़ा।#वैकुण्ठ#सृष्टि निर्माण#आधारशक्ति
लोकक्या भगवान विष्णु सोते समय भी सृष्टि संभालते हैं?हाँ, उनकी योगनिद्रा में भी सृष्टि का बीज और संतुलन सुरक्षित रहता है।#विष्णु#योगनिद्रा#सृष्टि पालन
लोककालचक्र भगवान विष्णु से कैसे जुड़ा है?विष्णु की श्वास और संकल्प से ही कालचक्र चलने लगता है।#कालचक्र#भगवान विष्णु#समय
लोकमहाप्रलय में समय रुक जाता है क्या?हाँ, कथा के अनुसार महाप्रलय में कालचक्र निष्क्रिय हो जाता है।#महाप्रलय#समय#कालचक्र
लोकसृष्टि से पहले समय क्यों नहीं था?क्योंकि सृष्टि से पहले गति और परिवर्तन नहीं थे, इसलिए समय भी सक्रिय नहीं था।#सृष्टि#समय#महाप्रलय
लोकसमय की शुरुआत कैसे हुई हिंदू धर्म में?हिंदू दृष्टि में समय ब्रह्मांडीय गति से शुरू होता है, जिसे विष्णु की श्वास ने जगाया।#समय#हिंदू धर्म#काल
लोककालचक्र की उत्पत्ति कैसे हुई?कालचक्र विष्णु की प्रथम श्वास से गति प्राप्त कर शुरू हुआ।#कालचक्र#समय#विष्णु
लोकक्या समय विष्णु की श्वास से शुरू हुआ?हाँ, कथा के अनुसार विष्णु की प्रथम श्वास से कालचक्र चलना शुरू हुआ।#समय#विष्णु श्वास#कालचक्र
लोकमाता लक्ष्मी को अतिथि सत्कार क्यों प्रिय है?अतिथि सत्कार घर की करुणा और धर्म का प्रमाण है।#माता लक्ष्मी#अतिथि सत्कार#धर्म
लोकब्रह्मा जी कमल-नाल में कितने समय तक गए?वे सौ दिव्य वर्षों तक खोजते रहे।#ब्रह्मा#कमल-नाल#दिव्य वर्ष
लोकब्रह्मा की रात कितनी लंबी होती है?ब्रह्मा की रात ४.३२ अरब मानव वर्षों की मानी गई है।#ब्रह्मा#कल्प#समय
लोकसात द्वार किन विकारों के प्रतीक हैं?ये काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्ष्या और अहंकार के प्रतीक हैं।#सात द्वार#विकार#वैकुण्ठ
लोकवैकुण्ठ द्वार का अर्थ क्या है?वैकुण्ठ द्वार दिव्य प्रवेश और विकार-त्याग का प्रतीक है।#वैकुण्ठ द्वार#मोक्ष#भक्ति
लोकवैकुण्ठ के सात द्वार क्या हैं?वैकुण्ठ के सात द्वार सात विकारों के त्याग का प्रतीक हैं।#वैकुण्ठ द्वार#सात द्वार#आध्यात्मिकता
लोकसमय विष्णु की श्वास से कैसे जुड़ा है?श्वास बाहर तो सृष्टि, भीतर तो प्रलय।#समय#विष्णु श्वास#कालचक्र
लोकत्रयोदशी श्राद्ध में रोहिण मुहूर्त क्या है?कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।#रोहिण मुहूर्त#त्रयोदशी#श्राद्ध समय
लोकत्रयोदशी श्राद्ध का सही मुहूर्त कौन सा है?कुतप, रोहिण और अपराह्न काल।#कुतप मुहूर्त#रोहिण मुहूर्त#अपराह्न
लोकत्रयोदशी तिथि पितृ पक्ष में क्यों महत्वपूर्ण है?यह पितृ तृप्ति की विशेष तिथि है।#त्रयोदशी तिथि#पितृ पक्ष#पितृ तृप्ति
लोकएकादशी श्राद्ध सुबह कर सकते हैं क्या?मुख्य श्राद्ध सुबह नहीं, कुतुप-अपराह्न में करें।#सुबह श्राद्ध#मुहूर्त#एकादशी
लोकएकादशी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?कुतुप के बाद का शुभ श्राद्ध समय।#रौहिण मुहूर्त#पिण्डदान#श्राद्ध
लोकएकादशी श्राद्ध में कुतुप मुहूर्त क्या है?श्राद्ध का श्रेष्ठ पवित्र समय।#कुतुप मुहूर्त#श्राद्ध काल#एकादशी
लोकदशमी श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन के समय मौन क्यों?श्रद्धा और पितृ भावना बनाए रखने के लिए।#मौन#ब्राह्मण भोजन#श्रद्धा
लोकदशमी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध समय।#रौहिण मुहूर्त#पिण्डदान#तर्पण
लोकअकाल मृत्यु का श्राद्ध किस तिथि को करें?पितृ पक्ष की चतुर्दशी को।#अकाल मृत्यु#घात चतुर्दशी#श्राद्ध
लोकदशमी तिथि पितृ पक्ष में क्यों महत्वपूर्ण है?यह पितरों की ग्रहणशील अवस्था की तिथि है।#दशमी तिथि#पितृ पक्ष#कनागत
लोककुतुप मुहूर्त में नवमी श्राद्ध क्यों करें?यह श्राद्ध आरंभ का श्रेष्ठ समय है।#कुतुप मुहूर्त#नवमी श्राद्ध#काल