विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण में महापापी को बार-बार दंड मिलने का स्पष्ट उल्लेख है।
नरक में मृत्यु नहीं — गरुड़ पुराण के अनुसार नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती। बेहोश होने पर भी पुनः जागृत किया जाता है ताकि दंड निरंतर चलता रहे।
एक के बाद एक नरक — 'एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को' — यह बार-बार दंड का स्वरूप है।
नरक में पुनः जीवित — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में वर्णित है कि नरक में जीव को यातना देकर पुनः उसके शरीर को जीवित किया जाता है ताकि वह पुनः कष्ट भोग सके।
पुनर्जन्म में भी पाप का प्रभाव — 'नरकों में दंड भोगकर अंत में अधम योनि में जन्म लेता है।' यहाँ भी उस पाप का परिणाम भोगना होता है — अंधापन, रोग, दरिद्रता आदि के रूप में।
भगवान की दया — गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि वृषोत्सर्ग जैसे दान से 'रौरव आदि नरकों में यातना पा रहे पूर्वज इक्कीस पीढ़ियों सहित तर जाते हैं।'





