विस्तृत उत्तर
जप में वस्त्र के नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित हैं:
देवता अनुसार वस्त्र रंग
| देवता | शुभ वस्त्र रंग |
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| शिव | श्वेत (सफेद) |
| विष्णु/कृष्ण | पीत (पीला) |
| दुर्गा/लक्ष्मी | लाल |
| काली/भैरव | काला या लाल |
| सरस्वती | श्वेत या पीत |
| गणेश | लाल या पीला |
सामान्य नियम
- 1स्वच्छता सर्वोपरि — रंग से अधिक महत्वपूर्ण
- 2धुले वस्त्र — अधुले वस्त्र में जप की ऊर्जा क्षीण
- 3ढीले वस्त्र — तंग कपड़ों में श्वास पर बाधा
- 4सिले से अधिक धोती/साड़ी — वैदिक परंपरा में
वर्जित
- ▸काले वस्त्र — सामान्य देव पूजा/जप में (शिव-काली के अलावा)
- ▸चमड़े के वस्त्र/बेल्ट
- ▸मैले वस्त्र
तंत्र साधना विशेष
तंत्र शास्त्र — देवी साधना में लाल, भैरव साधना में काला वस्त्र विशेष। नग्न साधना — कुछ तांत्रिक परंपराओं में (श्मशान साधना)।
धर्म सिंधु
शुचिवस्त्रेण देवं जपेत्।' — स्वच्छ वस्त्र पहनकर जप करें। स्वच्छता ही सर्वोच्च नियम है।





