विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में अग्नि का वर्णन अत्यंत भयावह है। यह अग्नि केवल जलाने के लिए नहीं — यह कर्म-शुद्धि का एक माध्यम भी है।
कालसूत्र नरक — इसमें लोहे की गर्म सलाखों का उपयोग होता है। पापी जीव को इन सलाखों से जलाया और दंडित किया जाता है।
कुंभीपाक नरक — 'कुंभ' (घड़े) में 'पाक' (पकाने) का नरक। इसमें पापी को गर्म तेल में उबाला जाता है — जैसे कड़ाही में तला जाता हो।
संप्रतापन नरक — यहाँ चारों ओर आग ही आग है। 'तपन' नरक में भी अत्यंत गर्मी और जलन की यातना है।
जलते अंगारे — कुछ नरकों में पापी को जलते अंगारों और गर्म रेत पर चलाया जाता है। यह वही कष्ट है जो यममार्ग पर भी था, परंतु नरक में यह और अधिक तीव्र होता है।
गरुड़ पुराण में अग्नि-यातना का प्रतीकात्मक अर्थ भी है — पाप जीव की आत्मा को जलाता है, इसी जलन को नरक में स्थूल रूप में अनुभव कराया जाता है।





