विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में नरक की यातनाओं का विस्तृत और भयावह वर्णन है। यातनाएँ पाप के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हैं।
गर्म तेल में उबाला जाना — कुंभीपाक नरक में, जिसने किसी की संपत्ति हड़पी हो या ब्रह्म-हत्या की हो।
लोहे की गर्म सलाखों से दंड — कालसूत्र नरक में।
कांटेदार वृक्षों पर लटकाना — झूठ बोलने वालों के लिए।
चट्टानों के बीच कुचला जाना — संघात नरक में।
कुत्तों-राक्षसों द्वारा नोचा जाना — सारमेयादन नरक में, दुराचारियों के लिए।
जलते पर्वत से नीचे गिराया जाना — अवीचि नरक में, धर्मद्रोहियों के लिए।
गर्म सुइयों से चुभोना — भ्रूण हत्या करने वालों के लिए।
मल से भरे स्थान में डुबोना — शुद्धता का अनादर करने वालों के लिए।
बार-बार मारकर पुनः जीवित करना — संजीवन नरक में, जहाँ यातना निरंतर दोहराई जाती है।
रक्त वमन कराना और उसे पीने पर विवश करना — वैतरणी में।
गरुड़ पुराण में ये यातनाएँ प्रतीकात्मक रूप में भी देखी जा सकती हैं — जो जीवन में दूसरों को कष्ट देता था, वह वैसा ही कष्ट पाता है।





