विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पापी को नरक भेजे जाने के पीछे एक गहरी दार्शनिक और न्यायिक व्यवस्था है।
पाप-फल भोगने के लिए — कर्म का नियम — 'नाभुक्तं क्षीयते कर्म।' जो पाप किया वह भोगना ही होगा। नरक इस भोग का स्थान है।
आत्मा की शुद्धि के लिए — गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है — 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि करना है। जब तक पाप का फल भुगता न जाए, तब तक आत्मा नरक में रहती है। इसके बाद उसे पुनः जन्म लेकर अच्छे कर्म करने का अवसर मिलता है।'
प्रत्येक पाप के अनुरूप दंड — 'पाप करने वाले व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर नरक में स्थान मिलता है।' प्रत्येक विशिष्ट पाप के लिए एक विशिष्ट नरक निर्धारित है।
धर्म-व्यवस्था का संरक्षण — यदि पाप का दंड न मिले तो धर्म की व्यवस्था ध्वस्त हो जाए। नरक इसीलिए है।
समाज को संदेश — नरक का भय मनुष्य को पाप से रोकता है और धर्माचरण की ओर प्रेरित करता है।





