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प्रेतकल्प में नरक का वर्णन क्यों किया गया है?

गरुड़ पुराण में नरक का वर्णन केवल भय दिखाने के लिए नहीं बल्कि गहरे दार्शनिक उद्देश्य के साथ किया गया है।

संक्षिप्त उत्तर

प्रेतकल्प में नरक का वर्णन — धर्माचरण की प्रेरणा के लिए, कर्म-न्याय सिद्ध करने के लिए, आत्म-शुद्धि का उद्देश्य बताने के लिए, पाप-दंड की जानकारी के लिए और मुमूर्षु को पश्चाताप-प्रेरणा के लिए।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में नरक का वर्णन केवल भय दिखाने के लिए नहीं बल्कि गहरे दार्शनिक उद्देश्य के साथ किया गया है।

धर्माचरण की प्रेरणा — गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है — 'इसी कारण भयभीत व्यक्ति अधिक दान-पुण्य करने की ओर प्रवृत्त होता है।' नरक का वर्णन मनुष्य को पापकर्म से विरत करने का उपाय है।

कर्म के नियम की पुष्टि — नरक का वर्णन यह सिद्ध करता है कि 'नाभुक्तं क्षीयते कर्म' — पाप का फल अवश्य भोगना पड़ता है। यह कर्म-न्याय का ठोस उदाहरण है।

नरक आत्मशुद्धि का स्थान — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि करना है।' जब तक पाप का फल भुगता न जाए, आत्मा नरक में रहती है, फिर उसे पुनर्जन्म का अवसर मिलता है।

भिन्न-भिन्न पापों के दंड — नरक के 21 से 36 प्रकारों का वर्णन इसलिए है कि लोगों को ज्ञात हो — किस पाप का क्या दंड है।

मुमूर्षु को चेतावनी — मृत्युशैया पर पड़े व्यक्ति को जब गरुड़ पुराण सुनाया जाता है, तो नरक का वर्णन उसे अंतिम समय में पश्चाताप और भगवान का स्मरण करने की प्रेरणा देता है।

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