विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में चंदन और भस्म दोनों शुभ हैं — किन्तु शैव परंपरा में भस्म (विभूति) प्रधान है:
भस्म (विभूति) — शैव परंपरा
- ▸शिव = भस्मधारी, श्मशानवासी — भस्म शिव का प्राथमिक आभूषण।
- ▸त्रिपुंड (तीन समानांतर रेखाएं) ललाट पर — शैव पहचान।
- ▸शिव पुराण: भस्म = मृत्यु का अंतिम सत्य, वैराग्य।
- ▸सावन, शिवरात्रि, प्रदोष पर भस्म विशेष शुभ।
चंदन — सामान्य/सात्विक
- ▸श्वेत चंदन = शीतलता, शांति।
- ▸चंदन का तिलक भी शिव को प्रिय — विशेषतः ग्रीष्म में।
- ▸चंदन + भस्म मिलाकर भी लगा सकते हैं।
नियम
- ▸शिवलिंग पर: चंदन (लेप) — शिवलिंग पर भस्म लगाना भी सही।
- ▸ललाट पर: त्रिपुंड (भस्म) = शैव, चंदन तिलक = सामान्य भक्त।
- ▸शिवलिंग पर सिंदूर/हल्दी/कुमकुम वर्जित (ये देवी पूजा सामग्री)।
सार: शुद्ध शैव परंपरा = भस्म त्रिपुंड। सामान्य भक्त = चंदन भी शुभ। दोनों एक साथ भी मान्य।





