विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पुण्यात्मा के लिए यममार्ग का वर्णन पापी जीव से बिल्कुल विपरीत और आनंददायक है।
पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के समय यमदूत नहीं आते — देवदूत दिव्य विमान लेकर आते हैं। उन्हें देखकर जीव को शांति और हर्ष होता है, कोई भय नहीं। दिव्य विमान में बैठकर यात्रा होती है — कोई गर्म बालू नहीं, कोई कोड़े नहीं, कोई भूख-प्यास नहीं।
वैतरणी नदी — जो पापी के लिए यातना का स्थान है — पुण्यात्मा के लिए सहज रूप से पार हो जाती है। गौदान करने वाले की गाय वहाँ प्रकट होती है। दानी को नाव मिलती है।
यमलोक में प्रवेश — पुण्यात्माओं को पूर्व, पश्चिम या उत्तर द्वार से सम्मानपूर्वक प्रवेश मिलता है। ऋषि-मुनि और सिद्ध पुरुष पूर्व द्वार से प्रवेश करते हैं जहाँ गंधर्व और अप्सराएँ स्वागत करती हैं।
गरुड़ पुराण का यह वर्णन जीवन के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है — पुण्यकर्म, दान और भक्ति मृत्यु के बाद की यात्रा को स्वर्गीय बना देते हैं।