ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

मृत्यु प्रश्नोत्तरी — 97 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित मृत्यु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 97 प्रश्न

अंतिम संस्कार

मृत्यु के बाद गाय दान क्यों करते हैं?

गरुड़ पुराण: वैतरणी नदी पार कराने गाय पूँछ पकड़ाती है। गाय = देवमाता (33 कोटि देव)। गो-दान = सबसे बड़ा दान, पाप क्षय। गाय न हो = गौशाला दान/धन दान। भाव प्रधान।

गो दानमृत्युवैतरणी
दिव्यास्त्र

घटोत्कच की मृत्यु के समय उसने क्या किया?

मृत्यु के अंतिम क्षणों में घटोत्कच ने अपना शरीर विशालकाय कर लिया और गिरते हुए कौरव सेना की एक पूरी अक्षौहिणी को कुचल दिया।

घटोत्कचमृत्युअंतिम क्षण
लोक

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।

मृत्युभगवान नामपाप नाश
लोक

मृत्यु के बाद स्वर्ग कैसे जाते हैं?

पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के बाद स्वर्ग का मार्ग सुगम होता है। मृत्यु के समय शालग्राम रखना, तुलसी दल और भगवान का नाम लेना स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है।

मृत्युस्वर्गयात्रा
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए कर्मों का परलोक से क्या संबंध है?

गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए गए कर्म ही परलोक की यात्रा तय करते हैं। पाप से नर्क, पुण्य से स्वर्ग। भोग के बाद पुनः भूलोक में जन्म होता है।

गरुड़ पुराणभूलोककर्म
लोक

भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?

मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।

भूलोकमृत्युपरलोक
शिव मंदिर

महाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?

प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।

श्मशान भस्ममहाकालेश्वरभस्म आरती
लोक

योग साधक मृत्यु के बाद सिद्धलोक में क्यों जाते हैं?

जो योग साधक पूर्ण वैराग्य नहीं पा सके वे मृत्यु के बाद अपनी सिद्धियों के फलस्वरूप भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।

योग साधकसिद्धलोकभुवर्लोक
लोक

पुण्यात्मा के लिए भुवर्लोक कैसा होता है?

पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक एक पारदर्शी सुगम मार्ग है। वे इससे होकर आसानी से स्वर्लोक या पितृलोक पहुँच जाते हैं बिना यहाँ फंसे।

भुवर्लोकपुण्यात्मास्वर्लोक
लोक

पापी आत्मा मृत्यु के बाद भुवर्लोक में क्यों फंस जाती है?

अत्यधिक पाप कर्म, भौतिक आसक्ति या अकाल मृत्यु के कारण आत्मा सीधे स्वर्ग-नरक नहीं जा पाती और प्रेत योनि में निचले भुवर्लोक में फंस जाती है।

भुवर्लोकपापी आत्मामृत्यु
अंतिम संस्कार

पंचक में मृत्यु हो तो क्या करें?

पंचक मृत्यु=अशुभ(5 और मृत्यु भय)। उपाय: 5 पुतले(कुश/आटा) मृतक साथ दाह, विशेष मंत्र, 5 तिल बत्ते। विद्वान पंडित से करवाएँ। देरी न करें।

पंचकमृत्युउपाय
दिव्यास्त्र

यमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने क्यों आए थे?

मार्कण्डेय की निश्चित आयु 16 वर्ष पूरी होने पर यमराज अपने दूतों के साथ उनके प्राण हरने आए। यह मृत्यु के विधान का पालन था।

यमराजमार्कण्डेयप्राण
दिव्यास्त्र

यमदण्ड को कालदण्ड क्यों कहते हैं?

यमदण्ड को कालदण्ड इसलिए कहते हैं क्योंकि यह 'समय का दण्ड' है — जब किसी का समय पूरा हो जाए तो मृत्यु के विधान से कोई नहीं बचा सकता।

यमदण्डकालदण्डकाल
दिव्यास्त्र

यमदण्ड क्या है?

यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

यमदण्डयमराजकालदण्ड
दिव्यास्त्र

गंगाजल मृत्यु के समय क्यों दिया जाता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल होने से शरीर और आत्मा पवित्र हो जाते हैं और यमदण्ड नहीं भोगना पड़ता। इसीलिए हिंदू परंपरा में अंतिम समय में गंगाजल देने का विधान है।

गंगाजलमृत्युयमदण्ड
दिव्यास्त्र

मृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?

मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।

तुलसीमृत्युयमदूत
अंतिम संस्कार

मृत व्यक्ति के मुख में सोना क्यों रखते हैं?

सोना = शुद्धतम धातु (अग्नि तत्व)। पंचतत्व शुद्धि, यमलोक यात्रा सहायता, अंतिम दान/पुण्य। मुख में स्वर्ण + गंगाजल + तुलसी। सोना न हो = चांदी/तांबा। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।

सोना मुख मेंमृत्युसंस्कार
अंतिम संस्कार

मृत व्यक्ति को तुलसी के पत्ते क्यों रखते हैं?

तुलसी = विष्णु प्रिया (मोक्ष सहायक)। यमदूत/प्रेत तुलसी के पास नहीं आते। गरुड़ पुराण: 4 पवित्र वस्तुओं में तुलसी। मुख में तुलसी+गंगाजल। शरीर पास तुलसी पौधा। वैज्ञानिक: एंटीबैक्टीरियल।

तुलसीमृत्युविष्णु प्रिय
श्रीमद्भागवत

कृष्ण का नाम लेते हुए मृत्यु से क्या फल मिलता है?

कृष्ण में मन लगाकर और उनके नाम का कीर्तन करते हुए शरीर छोड़ने वाला योगी कामना और कर्मबंधन से मुक्त होता है।

कृष्ण नाममृत्युभक्ति
श्रीमद्भागवत

पापी व्यक्ति को मृत्यु के बाद क्या कष्ट मिलते हैं?

धुंधुकारी के उदाहरण में पापी व्यक्ति मृत्यु के बाद प्रेत बनकर दिशाओं में भटकता, भूख-प्यास और शीत-घाम सहता है।

पापी व्यक्तिमृत्युप्रेत योनि
श्रीमद्भागवत

बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद क्या होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण में बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद प्रेत योनि, भूख-प्यास, भटकाव और असहायता के रूप में आया।

बुरे कर्मकर्मफलमृत्यु
श्रीमद्भागवत

मरने के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

इस कथा में धुंधुकारी अपने कुकर्मों, हिंसा और अपने ही दोष से प्रेत योनि में पड़ा बताया गया है।

प्रेत योनिकर्मफलमृत्यु
लोक

नित्य प्रलय क्या है?

नित्य प्रलय दैनिक मृत्यु और क्षय है।

नित्य प्रलयमृत्युक्षय
लोक

वैकुण्ठ में मृत्यु क्यों नहीं होती?

वैकुण्ठ जन्म-मृत्यु से परे शाश्वत धाम है।

वैकुण्ठमृत्युमोक्ष

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।