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योग प्रश्नोत्तरी — 64 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित योग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 64 प्रश्न

लोक

विशुद्ध चक्र क्या है?

विशुद्ध चक्र कण्ठ क्षेत्र में स्थित पाँचवाँ ऊर्जा केंद्र है जो सत्य, पवित्रता और उच्चतर आध्यात्मिक चेतना का द्वार है। गरुड़ पुराण इसे महर्लोक का सूक्ष्म प्रतिनिधित्व मानता है।

विशुद्ध चक्रकण्ठयोग
लोक

महर्लोक में 'तपो यज्ञ' क्या होता है?

तपो यज्ञ में साधक देह, इन्द्रियों और मन को तपस्या की अग्नि में शुद्ध करता है। इससे योग-अग्नि से पोषण संभव होता है और सभी देह-विकार नष्ट हो जाते हैं।

तपो यज्ञमहर्लोकतपस्या
लोक

योग साधना से महर्लोक कैसे मिलता है?

अष्टांग योग, सिद्धियाँ और संन्यास के माध्यम से सिद्ध योगी अपने प्राणों को स्वेच्छा से महर्लोक में ले जा सकते हैं। भागवत (११.२४.१४) यही कहता है।

योगमहर्लोकअष्टांग योग
लोक

शाक द्वीप में किसकी पूजा होती है?

शाक द्वीप में ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक निवासी प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा वायु देव (प्राणतत्व) की उपासना करते हैं।

शाक द्वीपवायु देवयोग
लोक

शाक द्वीप में वायु देव की उपासना कैसे होती है?

शाक द्वीप में ऋतव्रत आदि चार वर्ण प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा समाधिस्थ होकर भगवान के वायु स्वरूप (प्राणतत्व) की आराधना करते हैं।

शाक द्वीपवायु देवयोग
शिव पुराण परिचय

कैलाश संहिता में क्या वर्णित है

कैलाश संहिता (6,000 श्लोक) में कैलाश धाम की महिमा, शिव का आदियोगी स्वरूप, योग-ध्यान-मोक्ष मार्ग, शिव के पंचमुख स्वरूप और शिव-तत्व का दार्शनिक विवेचन है।

कैलाश संहितायोगशिव तत्व
लोक

भुवर्लोक की 'प्राण-मनस' अवधारणा का क्या अर्थ है?

प्राण-मनस अवधारणा का अर्थ है कि भुवर्लोक प्राण (जीवन ऊर्जा) और मन (चेतना) का संगम क्षेत्र है। योग साधक प्राण-नियंत्रण से यहाँ की सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

प्राण मनसभुवर्लोकवायु पुराण
लोक

वायु पुराण भुवर्लोक को 'प्राण-मनस लोक' क्यों कहता है?

वायु पुराण भुवर्लोक को प्राण-मनस लोक इसलिए कहता है क्योंकि यह वायु (प्राण) तत्व से बना है, यहाँ की सत्ताएं प्राणमय हैं और यह स्थूल तथा आध्यात्मिक जगत के बीच की कड़ी है।

वायु पुराणभुवर्लोकप्राण मनस
तीर्थ स्थल

ऋषिकेश में कौन से आश्रम जरूर जाएं?

परमार्थ निकेतन(गंगा आरती), शिवानंद आश्रम(योग/वेदांत), वशिष्ठ गुफा(ध्यान), बीटल्स आश्रम, स्वर्ग आश्रम, योग निकेतन। लक्ष्मण झूला, नीलकंठ महादेव भी।

ऋषिकेशआश्रमयोग
ध्यान साधना

ध्यान और योग में क्या अंतर है?

शास्त्रीय: योग=सम्पूर्ण 8 अंग, ध्यान=7वाँ अंग। योगसूत्र: ध्यान=एक विषय पर निरंतर प्रवाह। आधुनिक: योग=आसन/शारीरिक, ध्यान=मानसिक। सम्बंध: आसन→प्राणायाम→प्रत्याहार→धारणा→ध्यान→समाधि। ध्यान=योग का हृदय। दोनों परस्पर पूरक।

ध्यानयोगअष्टांग योग
अघोर फल

अघोर शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?

योग के द्वारा महादेव का ध्यान करने वाले मनीषी अविनाशी भगवान् रुद्र के दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।

अघोर ध्यानमहादेवयोग
वाराणसी और पार्वती प्रश्न

वाराणसी में पार्वती ने शिव से क्या पूछा?

पार्वती ने पूछा कि तप, विद्या, योग आदि किस साधन से शिव वश में होते, पूजित होते और दर्शन देते हैं।

वाराणसीपार्वतीशिव
योग और वैराग्य

युक्त योगी कौन होता है?

सभी आसक्तियों से निवृत्त प्राणी युक्त-योगी कहलाता है।

युक्त योगीआसक्ति निवृत्तियोग
प्राणायाम

प्राणायाम का सही अर्थ क्या है?

प्राण और अपान वायु का निरोध प्राणायाम कहलाता है।

प्राणायामप्राणअपान
प्रत्याहार और ध्यान

ध्यान और समाधि में क्या अंतर है?

ध्येय विषय में चित्त की एकाग्रता ध्यान है; ध्येयमात्र से प्रकाशित देहशून्य स्थिति समाधि है।

ध्यानसमाधिचित्त एकाग्रता
प्रत्याहार और ध्यान

इन्द्रियों को विषयों से कैसे हटाया जाता है?

विषयों में आसक्त इन्द्रियों को शीघ्र उनसे हटाकर इन्द्रियों पर नियंत्रण करना प्रत्याहार है।

प्रत्याहारइन्द्रियनिग्रहविषय
योग का स्वरूप

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है?

चित्त की एकाग्रता, रुद्र का ज्ञान और निर्वाण शिव की कृपा से बताए गए हैं।

शिव कृपायोगमुक्ति
योग का स्वरूप

योग का सही अर्थ क्या बताया गया है?

जीव को परमार्थ तत्त्व का ज्ञान प्राप्त होना योग कहा गया है; चित्तवृत्तियों पर नियंत्रण भी योग बताया गया है।

योगपरमार्थ तत्त्वचित्त एकाग्रता
पाशुपत योग

पाशुपत योग क्या है?

पाशुपत योग वह योग है जिसे पशुपति रुद्र ने सबको परम ऐश्वर्य दिलाने के लिए प्रवर्तित किया।

पाशुपत योगपशुपति रुद्रपरम ऐश्वर्य
शिष्य परम्परा

शैवी दीक्षा क्या बताई गई है?

शैवी दीक्षा का अलग विधि-वर्णन यहाँ नहीं है; योगाचार्यों के शिष्य शैवी दीक्षा से सम्पन्न बताए गए हैं।

शैवी दीक्षाशिष्यभस्म
शिष्य परम्परा

योगाचार्यों के शिष्यों के गुण क्या थे?

योगाचार्यों के शिष्य धर्मात्मा, महान् ओजस्वी, विमल आत्मा, सिद्ध, ब्रह्मनिष्ठ, ज्ञान-योग में निरत, भस्म-विभूषित और शैवी दीक्षा से सम्पन्न थे।

योगाचार्य शिष्यधर्मात्माब्रह्मनिष्ठ
शिष्य परम्परा

शिव की कृपा से योग में कौन प्रवृत्त हुए?

व्यासावतार, योगाचार्यावतार, शिवावतार, चार शिष्य और अनेक प्रशिष्य महेश्वर की कृपा से योग में प्रवृत्त हुए।

शिव कृपायोगव्यासावतार
माहेश्वर योग

ज्ञान से योग और योग से मुक्ति कैसे मिलती है?

शंकर की अनुकम्पा से ज्ञान, ज्ञान से योग में प्रवृत्ति और योग से मुक्ति प्राप्त होती है।

ज्ञानयोगमुक्ति
माहेश्वर योग

शिव की कृपा से ज्ञान कैसे मिलता है?

शिव की अनुकम्पा से ज्ञान उत्पन्न होता है; उसी ज्ञान से योग में प्रवृत्ति होती है।

शिव कृपाज्ञानयोग

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।