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भागवत कथा प्रश्नोत्तरी — 68 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भागवत कथा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 68 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?

वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

वक्ता दिशाआसनभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में सहायक वक्ता क्यों चाहिए?

वक्ता के पास ऐसा विद्वान सहायक रखना चाहिए जो श्रोताओं के संशय दूर कर सके और लोगों को समझाने में कुशल हो।

सहायक वक्तासंशयभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में कैसे वक्ता से बचना चाहिए?

जो अनेक धर्मों के भ्रम में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करें, ऐसे पंडित भी भागवत वाचन के लिये अयोग्य बताए गए हैं।

वक्ता चयनपाखंडभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा का वक्ता किसे बनाना चाहिए?

भागवत कथा का वक्ता वैष्णव ब्राह्मण, वेद-शास्त्र में पारंगत, दृष्टांत-कुशल, धीर, विवेकी और निःस्पृह होना चाहिए।

वक्ताभागवत कथावैष्णव ब्राह्मण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के वक्ता कैसे होने चाहिए?

वक्ता वेद-शास्त्र की व्याख्या में समर्थ, दृष्टांत देने में कुशल, विवेकी, निःस्पृह और वैष्णव ब्राह्मण होना चाहिए।

वक्ताभागवत कथावैष्णव
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने कौन आ सकता है?

कथा सुनने के लिये परिवार सहित सबको बुलाया गया है; धनहीन, रोगी, पापी, संतानहीन और मोक्ष चाहने वाले भी इसे सुनें।

श्रोताभागवत कथासर्वजन
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में किन लोगों को बुलाना चाहिए?

कथा में परिवार सहित जनसमुदाय, स्त्रियाँ, शूद्र, हरिकथा से दूर लोग, विरक्त वैष्णव और कीर्तन-प्रेमियों को बुलाने की बात कही गई है।

निमंत्रणभागवत कथावैष्णव
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा का मंडप कैसे बनाएं?

मंडप ऊँचा, केले के खंभों से सुसज्जित, फल-पुष्प-पत्तों और चंदोवे से अलंकृत तथा ध्वजाओं से सजाया हुआ बताया गया है।

मंडपभागवत कथाकथा तैयारी
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा कहाँ करानी चाहिए?

भागवत कथा तीर्थ, वन या घर में कराई जा सकती है; मुख्य बात है कि स्थान विस्तृत, शुद्ध और सज्जित हो।

कथा स्थानभागवत कथातीर्थ
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के शुभ महीने कौन से हैं?

भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण कथा आरंभ के शुभ महीने बताए गए हैं।

भागवत कथाशुभ महीनेश्रावण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के नित्य पाठ से क्या मिलता है?

इस पवित्र आख्यान के नित्य पाठ से अपुनर्भव, यानी पुनर्जन्म से छूटने का फल बताया गया है।

नित्य पाठभागवत कथामोक्ष
श्रीमद्भागवत

श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

श्राद्धभागवत कथापितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?

दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।

सर्वमुक्तिभागवत कथागोकर्ण
श्रीमद्भागवत

श्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?

श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।

श्रावण मासभागवत कथासप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

भगवान कृष्णभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?

धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।

वैकुंठभागवत कथाश्रवण फल
श्रीमद्भागवत

जीवन का स्थायी फल कैसे मिले?

नश्वर शरीर से स्थायी फल पाने का मार्ग भागवत कथा श्रवण, पाप-क्षय, संशय-नाश और मुक्ति से जोड़ा गया है।

जीवनस्थायी फलभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?

भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।

कथा तीर्थभागवत कथामुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से कर्म कैसे नष्ट होते हैं?

सप्ताह श्रवण को पाप जलाने वाली अग्नि और कर्म क्षीण करने वाला साधन कहा गया है।

कर्मपाप नाशभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?

सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

संशयभागवत कथाहृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?

कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

हृदय ग्रंथिभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।

श्रद्धाभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?

सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।

भागवत कथाप्रेत मुक्तिसप्ताह
श्रीमद्भागवत

गया श्राद्ध के बाद भी प्रेत बाधा क्यों रहती है?

कथा में धुंधुकारी के अपने दोष और असंख्य कुकर्म इतने भारी बताए गए हैं कि गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई।

गया श्राद्धप्रेत बाधाकर्मफल

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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