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यमराज प्रश्नोत्तरी — 84 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यमराज विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 84 प्रश्न

लोक

काकबलि क्यों देते हैं?

कौवे को यमराज का प्रतीक मानकर काकबलि दी जाती है।

काकबलिकौवायमराज
लोक

काकबलि क्यों देते हैं?

कौआ पितृलोक से जुड़ा प्रतीक है, इसलिए काकबलि दी जाती है।

काकबलिकौआयमराज
लोक

यमराज और भरणी नक्षत्र का संबंध क्या है?

भरणी नक्षत्र यमराज के अधीन है और पितृलोक से जुड़ा है।

यमराजभरणी नक्षत्रपितृलोक
लोक

भरणी नक्षत्र के अधिपति कौन हैं?

भरणी नक्षत्र के अधिपति यमराज हैं।

भरणी नक्षत्रअधिपतियमराज
लोक

भरणी नक्षत्र श्राद्ध में खास क्यों है?

भरणी नक्षत्र यमराज से जुड़ा है, इसलिए पितृ श्राद्ध में विशेष है।

भरणी नक्षत्रश्राद्धयमराज
पद्म पुराण

यम-द्वितीया क्या है?

यम-द्वितीया कार्तिक शुक्ल द्वितीया का एक विशेष नाम है। पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में देवी यमुना ने इसी तिथि पर अपने भाई यमराज को घर में आदरपूर्वक भोजन कराया था। प्रसन्न यमराज ने द्वितीया को महोत्सर्ग घोषित किया, और नरक के जीवों को भी तृप्ति दी। इसे भाई-दूज या भ्रातृ-द्वितीया भी कहते हैं।

यम-द्वितीयाभ्रातृ द्वितीयायमराज
पुराण माहात्म्य

द्वितीया श्राद्ध से शिव क्यों प्रसन्न होते हैं?

द्वितीया श्राद्ध से शिव इसलिए प्रसन्न होते हैं क्योंकि शिव महाकाल हैं यानी मृत्यु और समय के परम देवता। यमराज शिव के अधीन हैं, और द्वितीया तिथि पर यमराज का विशेष आधिपत्य रहता है। जब कर्ता भक्ति से पितरों का श्राद्ध करता है, तो यमराज प्रसन्न होते हैं और शिव भी प्रसन्न होते हैं। भक्तिपूर्वक पितृ-सेवा शिव की सेवा के समान है।

शिव प्रसन्नताद्वितीया श्राद्धमहाकाल
तिथि शास्त्र

द्वितीया तिथि का अधिष्ठाता देवता कौन है?

द्वितीया तिथि का मुख्य अधिष्ठाता देवता यमराज हैं, जिनका इस तिथि पर विशेष आधिपत्य रहता है। पद्म पुराण के अनुसार यमुना ने यमराज को इसी तिथि पर भोजन कराया था। श्राद्ध के मूल अधिष्ठाता देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं, जो क्रमशः पिता, पितामह और प्रपितामह पीढ़ियों के प्रतिनिधि हैं। साथ ही विश्वेदेव पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष भी आहूत होते हैं।

यमराजद्वितीया अधिष्ठातावसु रुद्र आदित्य
लोक

पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके क्यों किया जाता है?

पितरों और यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है, इसलिए पितृ तर्पण दक्षिणाभिमुख होता है।

दक्षिण दिशापितृ तर्पणयमराज
लोक

यमपुरी में प्रवेश के बाद आत्मा का न्याय कैसे होता है?

यमपुरी में चित्रगुप्त कर्म-वृत्तांत पढ़ते हैं और यमराज उसी के आधार पर आत्मा का न्याय करते हैं।

यमपुरीआत्मा न्यायचित्रगुप्त
लोक

सौरिपुर क्या है?

सौरिपुर यममार्ग का दूसरा नगर है, जहाँ यमराज का छोटा भाई सौरि शासन करता है और आत्मा द्वितीय मास का पिंड ग्रहण करती है।

सौरिपुरयममार्गयमराज
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

यमदूतयमराजमृत्यु
लोक

यमराज के सामने श्रवण देव गवाह कैसे बनते हैं?

यदि आत्मा पाप नकारती है, तो श्रवण-श्रवणी देव यमराज के सामने प्रत्यक्ष गवाह बनकर उसके कर्मों का प्रमाण देते हैं।

श्रवण देवयमराजगवाह
लोक

चित्रगुप्त जीवों के कर्मों का लेखा कैसे रखते हैं?

चित्रगुप्त अग्रसंधानी पुस्तिका में कर्म दर्ज रखते हैं और श्रवण-श्रवणी देव हर गुप्त कर्म की सूचना पहुँचाते हैं।

चित्रगुप्तकर्म लेखाअग्रसंधानी
लोक

चित्रगुप्त की उत्पत्ति कैसे हुई?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की १००० वर्षों की तपस्या से उनकी काया से प्रकट हुए, इसलिए वे कायस्थ कहलाए।

चित्रगुप्त उत्पत्तिब्रह्माकायस्थ
लोक

यमराज भगवान विष्णु के प्रतिनिधि कैसे हैं?

यमराज भगवान विष्णु की दण्ड व्यवस्था के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।

यमराजभगवान विष्णुधर्मराज
लोक

यमराज वैष्णव भक्तों पर अधिकार क्यों नहीं रखते?

वैष्णव भक्त अपने कर्म भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं, इसलिए उन पर यमराज का अधिकार नहीं होता और विष्णुदूत उन्हें वैकुण्ठ ले जाते हैं।

यमराजवैष्णव भक्तविष्णु भक्त
लोक

यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार क्यों करते हैं?

यमराज का व्यवहार जीवात्मा के कर्मों के अनुसार होता है; पापी को भय और पुण्यात्मा को सम्मान प्राप्त होता है।

यमराजपापी आत्मापुण्यात्मा
लोक

यमराज सूर्यपुत्र कैसे हैं?

यमराज सूर्य विवस्वान के पुत्र माने गए हैं; इसलिए उनका एक नाम वैवस्वत भी है।

यमराजसूर्यपुत्रविवस्वान
लोक

यमराज को धर्मराज क्यों कहा जाता है?

यमराज कर्मों का निष्पक्ष न्याय करते हैं और पाप-पुण्य का संतुलन स्थापित करते हैं, इसलिए उन्हें धर्मराज कहा जाता है।

धर्मराजयमराजन्याय
लोक

यमराज कौन हैं?

यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।

यमराजधर्मराजमृत्यु देवता
लोक

यमलोक में जीवात्मा के कर्मों का न्याय कैसे होता है?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका में दर्ज कर्मों के आधार पर यमराज जीवात्मा का निष्पक्ष निर्णय करते हैं।

यमलोक न्यायचित्रगुप्तकर्म लेखा
लोक

यमलोक का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यमलोक का उद्देश्य हर जीव के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करके उसके अनुसार न्याय और दंड या फल देना है।

यमलोक उद्देश्यकर्म न्यायधर्मराज
लोक

महातल लोक और नरक लोक में क्या अंतर है?

महातल बिल-स्वर्ग है जहाँ भौतिक सुख हैं; नरक पाताल से नीचे दंड और यातना के स्थान हैं।

महातल नरक अंतरबिल-स्वर्गनरक लोक

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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