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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

लोक

सपिण्डीकरण के बाद प्रेत को पितृ पद कैसे मिलता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत का पिण्ड पितरों से मिलते ही वह पितृलोक में प्रवेश कर वसु रूप पितृ बन जाता है।

सपिण्डीकरणप्रेत पदपितृ पद
लोक

मृत्यु के बाद जीव प्रेत से पितृ कैसे बनता है?

सपिण्डीकरण के बाद प्रेत पितृलोक में प्रवेश कर पितृ श्रेणी में आता है और वसु स्वरूप प्रथम पितृ बनता है।

प्रेत से पितृसपिण्डीकरणगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत बाधा से वंश का विनाश कैसे होता है?

श्राद्ध न होने पर प्रेत बाधा कुल को निःसंतान, दरिद्र, रोगी और जीविका-रहित बनाकर वंश विनाश तक ले जाती है।

प्रेत बाधावंश विनाशगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत बाधा परिवार को कैसे प्रभावित करती है?

प्रेत बाधा परिवार की मति, प्रीति, रीति, लक्ष्मी और बुद्धि नष्ट कर वंश को दरिद्र, रोगी और निःसंतान बना सकती है।

प्रेत बाधापरिवारवंश विनाश
लोक

स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना क्या संकेत देता है?

स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना प्रेत बाधा और भटकते पूर्वज के संकेत के रूप में बताया गया है।

स्वप्न संकेतप्रेत बाधाविकृत मुख
लोक

प्रेत बाधा के लक्षण क्या हैं?

स्वप्न में घोड़ा, हाथी, बैल, विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना या जागने पर विपरीत दिशा में होना प्रेत बाधा का संकेत है।

प्रेत बाधालक्षणस्वप्न
लोक

गर्भपात करवाने वाले को शास्त्रों में क्या दंड बताया गया है?

गर्भपात करवाने वाला घोर यातना के बाद प्रेत योनि प्राप्त कर सकता है और पुनर्जन्म में रोगी या नीच अवस्था पा सकता है।

गर्भपातप्रेत योनिविष्णु पुराण
लोक

गोहत्या करने वाले को वैतरणी और प्रेत योनि क्यों मिलती है?

गोहत्या महापातक है; ऐसा पापी वैतरणी की यातना भोगकर प्रेत योनि में आता है।

गोहत्यावैतरणीप्रेत योनि
लोक

गुरुपत्नी गमन का फल क्या बताया गया है?

गुरुपत्नी गमन करने वाला शाल्मली नरक में कांटों से भरे जलते वृक्षों का दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।

गुरुपत्नी गमनमहापातकशाल्मली नरक
लोक

स्वर्ण चोरी करने वाला प्रेत योनि क्यों पाता है?

स्वर्ण चोरी महापातक है; ऐसा जीव कुम्भीपाक नरक में दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।

स्वर्ण चोरीप्रेत योनिकुम्भीपाक
लोक

ब्रह्महत्या का प्रेत योनि से क्या संबंध है?

ब्रह्महत्या महापातक है; ऐसा पापी महारव नरक की यातना के बाद प्रेत योनि में आता है।

ब्रह्महत्याप्रेत योनिमहारव नरक
लोक

महापातक करने वाला प्रेत क्यों बनता है?

महापातक करने वाला जीव पहले नरक यातना भोगता है और फिर तामसिक कर्मों के कारण प्रेत योनि में आता है।

महापातकप्रेत योनिनरक
लोक

हत्या के बाद आत्मा प्रेत रूप में क्यों भटकती है?

हत्या अकाल और हिंसक मृत्यु है; अधूरी आयु, आसक्ति और संस्कार-अभाव से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

हत्याप्रेत योनिअकाल मृत्यु
लोक

सर्पदंश या विषपान से मृत्यु प्रेत योनि का कारण क्यों है?

सर्पदंश और विषपान अकाल मृत्यु हैं; अधूरी आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत योनि में जा सकती है।

सर्पदंशविषपानअकाल मृत्यु
लोक

जल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?

जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

जल में डूबनाअकाल मृत्युप्रेत योनि
लोक

आत्महत्या के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

आत्महत्या अकाल मृत्यु है; आयु और आसक्ति शेष रहने से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

आत्महत्याप्रेत योनिअकाल मृत्यु
लोक

कौन-कौन सी मृत्यु अकाल मृत्यु मानी गई है?

जल में डूबना, अग्नि में जलना, गिरकर मरना, सर्पदंश, विषपान, आत्महत्या और हत्या अकाल मृत्यु मानी गई हैं।

अकाल मृत्युगरुड़ पुराणप्रेत योनि
लोक

अकाल मृत्यु से प्रेत योनि क्यों मिलती है?

अकाल मृत्यु में जीव की आयु और आसक्ति शेष रहती है, इसलिए वह शेष आयु तक प्रेत रूप में भटक सकता है।

अकाल मृत्युप्रेत योनिगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत कल्प तक भटकता क्यों है?

पिण्डदान और श्राद्ध के अभाव में आत्मा आगे की गति नहीं पाती, इसलिए प्रेत रूप में कल्प तक भटकती है।

प्रेतकल्प तक भटकनापिण्डदान
लोक

गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।

गरुड़ पुराणप्रेत योनिपिण्डदान
लोक

पिण्डदान न होने पर आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

पिण्डदान और श्राद्ध न होने से आत्मा को पितृगति नहीं मिलती, इसलिए वह प्रेत बनकर दुखपूर्वक भटकती है।

पिण्डदानप्रेत योनिगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।

प्रेत भूख प्यासप्रेत योनिअतृप्ति
लोक

प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

प्रेत शरीरवायव्य शरीरसूक्ष्म शरीर
लोक

प्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?

प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।

प्रेत बनने का कारणपिण्डदानअकाल मृत्यु

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