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ग्रन्थ

पुराण परिचय(81)

पुराण परिचय पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 81 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

तपोलोक किस धर्म ग्रंथों में बताया गया है?

तपोलोक का वर्णन पुराणों, उपनिषदों, स्मृतियों और वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान में मिलता है।

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नीलकंठ स्तोत्र की पहचान और स्रोत

नीलकंठ स्तोत्र पुराण से है या तंत्र से?

नीलकंठ का तत्व पुराणों (शिवपुराण) में है, लेकिन यह विशेष स्तोत्र तंत्र (रामेश्वर तंत्र) से है। इसकी बीज मंत्र संरचना शुद्ध रूप से तांत्रिक है।

#पुराण#तंत्र#नीलकंठ स्तोत्र
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

भृंगी प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?

भृंगी प्रसंग से शिक्षा मिलती है कि साधना में अहंकार और भेद बुद्धि स्वीकार्य नहीं है और शिव-शक्ति दोनों की पूजा समान रूप से अनिवार्य है।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ऋषि भृंगी को क्या दंड मिला?

भृंगी को अपूर्णता का दंड मिला (शरीर से मांस और रक्त छिन गया), किंतु पार्वती के अनुनय पर शिव ने उन्हें संबल हेतु तीसरी टांग दी।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

भृंगी प्रसंग में शिव ने क्या किया?

भृंगी प्रसंग में शिव ने पार्वती के मान की रक्षा हेतु स्वयं को पार्वती के साथ एकाकार कर अर्धनारीश्वर रूप धारण कर लिया।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ऋषि भृंगी ने पार्वती की पूजा क्यों नहीं की?

ऋषि भृंगी केवल शिव के भक्त थे और शिव-शक्ति में भेद मानते थे, इसीलिए उन्होंने पार्वती की पूजा से इनकार किया।

#ऋषि भृंगी#पार्वती#शिव भक्त
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ऋषि भृंगी कौन थे?

ऋषि भृंगी शिव के परम भक्त थे जो केवल शिव की पूजा करते थे और पार्वती की परिक्रमा से इनकार करते थे। उनकी कथा से अर्धनारीश्वर स्वरूप के प्रकट होने का एक प्रसंग जुड़ा है।

#ऋषि भृंगी#शिव भक्त#अर्धनारीश्वर कथा
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

पार्वती ने महादेव से क्या इच्छा प्रकट की थी?

पार्वती ने महादेव से 'अंग से अंग' मिलाकर हमेशा के लिए साथ रहने की इच्छा प्रकट की थी, जिससे अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्राकट्य हुआ।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

स्कंदपुराण में अर्धनारीश्वर रूप कैसे प्रकट हुआ?

स्कंदपुराण के अनुसार, पार्वती ने शिव से 'अंग से अंग' मिलाकर रहने की इच्छा प्रकट की — उनकी इस परम भक्ति और प्रेम से अर्धनारीश्वर रूप का प्राकट्य हुआ।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ब्रह्मा ने शिव से अर्धनारीश्वर रूप क्यों माँगा?

ब्रह्मा केवल पुरुष प्राणियों का सृजन कर पाए थे और सृष्टि विस्तार संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने शिव से प्रार्थना की — तब शिव ने अर्धनारीश्वर रूप दिखाया।

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पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

शिवपुराण में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य कैसे हुआ?

शिवपुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा सृष्टि विस्तार में असमर्थ हुए तब शिव ने अर्धनारीश्वर रूप दिखाया, जिससे ब्रह्मा को स्त्री-पुरुष दोनों की आवश्यकता का ज्ञान हुआ। (रुद्रसंहिता, प्रथम खण्ड)

#शिवपुराण#अर्धनारीश्वर प्राकट्य#ब्रह्मा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रावण की माता का क्या नाम था?

रामचरितमानस में रावण की माता का नाम सीधे नहीं आता। पुराणों के अनुसार माता का नाम कैकसी (सुमाली राक्षस की पुत्री) था। कैकसी विश्रवा मुनि की पत्नी थीं। रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा कैकसी की सन्तान थे।

#बालकाण्ड#रावण माता#कैकसी
तिथि और माहात्म्य

देवशयनी एकादशी के अन्य नाम क्या हैं (पद्मा, हरिशयनी)?

इस एकादशी को हरिशयनी, शयनी, पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और 'महा-एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है।

#हरिशयनी#पद्मा एकादशी#पुराण
इतिहास एवं पुराण

राजा बभ्रुवाहन किस युग में किस नगर में रहते थे?

बभ्रुवाहन अर्जुन के पुत्र थे जो द्वापर युग में मणिपुर नगर के राजा थे। इनका संबंध महाभारत (अश्वमेध पर्व) से है — गरुड़ पुराण में इनका कोई उल्लेख नहीं मिलता।

#बभ्रुवाहन#मणिपुर#अर्जुन
पुराण ज्ञान

स्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?

स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।

#स्कंद पुराण#सबसे बड़ा पुराण#कार्तिकेय
पुराण ज्ञान

अग्नि पुराण कब और किसे पढ़ना चाहिए?

अग्नि पुराण भारतीय विश्वकोश है — इसमें विष्णु-अवतार, पूजा-विधि, वास्तु, ज्योतिष, आयुर्वेद, धनुर्वेद, रामायण-महाभारत सार सब एक साथ है। जो व्यापक ज्ञान चाहे वह इसे पढ़े। शुद्ध मन से कभी भी पढ़ा जा सकता है।

#अग्नि पुराण#भारतीय विश्वकोश#कर्मकाण्ड
पुराण ज्ञान

मार्कण्डेय पुराण में क्या लिखा है?

मार्कण्डेय पुराण में मुख्यतः दुर्गासप्तशती (देवी माहात्म्य) है जो शाक्त परम्परा का सर्वोच्च ग्रन्थ है। साथ ही राजा हरिश्चन्द्र, दत्तात्रेय, मदालसा की कथाएँ, सूर्योपासना और गृहस्थ-धर्म का वर्णन है। इसमें १३७ अध्याय और ९,००० श्लोक हैं।

#मार्कण्डेय पुराण#दुर्गासप्तशती#शाक्त पुराण
पुराण ज्ञान

वराह पुराण में पृथ्वी की उत्पत्ति कथा

वराह पुराण की मुख्य कथा है — हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। भगवान विष्णु ने ब्रह्माजी की नासिका से वराह रूप में प्रकट होकर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को अपने दाँतों पर धारण कर यथास्थान स्थापित किया।

#वराह पुराण#पृथ्वी उत्पत्ति#वराह अवतार
पुराण ज्ञान

पद्म पुराण का मुख्य विषय क्या है?

पद्म पुराण वैष्णव पुराण है जिसमें ५५,००० श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय भगवान विष्णु की उपासना है। साथ ही राम-कृष्ण चरित्र, तीर्थ-माहात्म्य, तुलसी-महिमा, शालग्राम-स्वरूप और व्रत-विधियाँ हैं। यह पाँच (या सात) खण्डों में विभाजित है।

#पद्म पुराण#वैष्णव पुराण#वेदव्यास
पुराण ज्ञान

भागवत पुराण में कितने स्कंध हैं?

भागवत पुराण में १२ स्कन्ध, ३३५ अध्याय और १८,००० श्लोक हैं। सबसे प्रसिद्ध दशम स्कन्ध है जिसमें श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण लीलाएँ हैं। यह वेदव्यास रचित भक्तियोग का महान पुराण है।

#भागवत पुराण#स्कंध#श्रीमद्भागवतम्
पुराण परिचय

दुर्गा सप्तशती किस पुराण से ली गई है?

दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण के 81वें से 93वें अध्याय (कुल 13 अध्याय) से ली गई है। इसे 'देवी महात्म्य' भी कहते हैं। मार्कंडेय पुराण में सुमेधा ऋषि, राजा सुरथ और वैश्य समाधि के संवाद में यह कथा वर्णित है।

#मार्कंडेय पुराण#देवी महात्म्य#सप्तशती
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण वेदव्यास रचित 24,000 श्लोक, 7 संहिताओं का महापुराण है। इसमें ज्योतिर्लिंग कथा, सती-पार्वती कथा, शिव-पार्वती विवाह, गणेश-कार्तिकेय जन्म, हलाहल पान और शिव-विष्णु एकता का संदेश है।

#शिव पुराण#7 संहिता#24000 श्लोक
पुराण परिचय

देवी भागवत क्या है?

देवी भागवत पुराण वेदव्यास रचित 18,000 श्लोक, 12 स्कंधों का ग्रंथ है। इसमें आदि शक्ति महामाया का माहात्म्य, देवी गीता (शाक्त दर्शन), दुर्गा-महिषासुर युद्ध, 108 शक्तिपीठ और नवदुर्गा उपासना का वर्णन है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष पुण्यकारी है।

#देवी भागवत#श्रीमद्देवीभागवत#शक्ति पुराण
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण वेदव्यास रचित 18 महापुराणों में से एक है — 24,000 श्लोक, 7 संहिताएं। इसमें शिव के सभी स्वरूप, सती-पार्वती कथा, गणेश जन्म, 12 ज्योतिर्लिंग माहात्म्य, दक्ष यज्ञ और हलाहल पान की कथाएं हैं। शिव-विष्णु एकता का संदेश इसकी विशेषता है।

#शिव पुराण#7 संहिता#शिव कथा
पुराण परिचय

पुराण कितने हैं?

18 महापुराण हैं — वेदव्यास रचित। सबसे बड़ा स्कंद पुराण (81,100 श्लोक), सबसे प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत पुराण। तीन वर्ग: सात्विक (वैष्णव), राजसिक (ब्राह्म), तामसिक (शैव)। इनके अतिरिक्त 18 उपमहापुराण भी हैं।

#18 पुराण#महापुराण#उपमहापुराण
पुराण परिचय

दुर्गा सप्तशती किस पुराण से ली गई है?

दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण के अध्याय 81 से 93 से ली गई है। इसे 'देवी महात्म्यम्' भी कहते हैं। मार्कंडेय पुराण 18 महापुराणों में से एक है और शाक्त परंपरा का सर्वोच्च ग्रंथ है।

#मार्कंडेय पुराण#सप्तशती#स्रोत
पुराण परिचय

शिव पुराण क्या है?

शिव पुराण 18 महापुराणों में से एक है, जिसमें 24,000 श्लोक हैं। इसमें 7 संहिताएं हैं — शिव पूजा विधि, 12 ज्योतिर्लिंग कथाएं, शिव-पार्वती विवाह और मोक्ष मार्ग का वर्णन है। वेदव्यास जी इसके रचयिता हैं।

#शिव पुराण#महापुराण#संहिता
सृष्टि विज्ञान

ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ?

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।

#ब्रह्मांड#सृष्टि#नासदीय सूक्त
पौराणिक ज्ञान

सात चिरंजीवी कौन हैं और अमर क्यों?

सप्त चिरंजीवी: अश्वत्थामा (शाप), बलि (विष्णु वरदान), व्यास (धर्म रक्षा), हनुमान (सीता वरदान), विभीषण (राम वरदान), कृपाचार्य (ब्रह्मा वरदान), परशुराम (कल्कि गुरु)। आठवें मार्कण्डेय (शिव कृपा)। पद्म पुराण श्लोक सहित।

#सप्त चिरंजीवी#अमरत्व#पुराण
देवी ग्रंथ

देवी भागवत पुराण का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

देवी भागवत = शाक्त प्रमुख ग्रंथ (12 स्कंध, 318 अध्याय)। पाठ: नवरात्रि सर्वोत्तम, शुक्रवार, पूर्णिमा। 7 या 9 दिन में सम्पूर्ण। सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य। पूर्ण होने पर हवन+दान। विषय: देवी = सर्वोच्च ब्रह्म। फल: पाप नाश, भोग-मोक्ष।

#देवी भागवत#पुराण#पाठ विधि
शिव ग्रंथ

लिंग पुराण और शिव पुराण में क्या अंतर है?

शिव पुराण: 7 संहिताएं, ~24,000 श्लोक, कथा+पूजा प्रधान (शिव विवाह, दक्ष यज्ञ, ज्योतिर्लिंग)। लिंग पुराण: 2 भाग, ~11,000 श्लोक, शिवलिंग दर्शन+ब्रह्मांड विज्ञान (28 शिव अवतार)। शिव पुराण = भक्तिमार्गी, लिंग पुराण = ज्ञानमार्गी।

#लिंग पुराण#शिव पुराण#अंतर
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रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, वेद, उपनिषद — सभी ग्रन्थों की सूची।

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