दर्शननेति नेति का अर्थ क्या है उपनिषदों में?
'नेति नेति' (यह नहीं, यह नहीं) = बृहदारण्यक उपनिषद (2.3.6)। ब्रह्म को जानने की निषेध विधि — जो कुछ भी सीमित/नाशवान/दृश्य है, वह ब्रह्म नहीं। सब नकार दो, जो शेष बचे वही ब्रह्म। शंकराचार्य: यह शून्य नहीं, अतिरेक है।
#नेति नेति#बृहदारण्यक उपनिषद#निर्गुण ब्रह्म