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विष्णु पुराण(95)

विष्णु पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 95 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

विष्णु पुराण के छठे अंश में महर्लोक के संताप का वर्णन क्या है?

विष्णु पुराण (६.३.२८-२९) में वर्णन है कि संकर्षण की अग्नि का भयंकर ताप महर्लोक को संतापित करता है जिससे भृगु आदि महर्षि इसे छोड़कर जनलोक की ओर पलायन करते हैं।

#विष्णु पुराण 6.3#महर्लोक#संताप
लोक

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में महर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण महर्लोक की कृतकाकृतक प्रकृति और प्रलय-विज्ञान पर बल देता है। भागवत इसे विराट पुरुष की ग्रीवा बताता है और खगोलीय दूरियाँ देता है। दोनों इसकी सात्त्विकता पर एकमत हैं।

#विष्णु पुराण#भागवत पुराण#महर्लोक
लोक

'कृतक', 'अकृतक' और 'कृतकाकृतक' लोकों में क्या अंतर है?

कृतक लोक (त्रैलोक्य) विनाशी हैं, अकृतक (जनलोक से सत्यलोक तक) नित्य हैं। महर्लोक कृतकाकृतक है — नैमित्तिक प्रलय में भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है।

#कृतक#अकृतक#कृतकाकृतक
लोक

संकर्षण की अग्नि से महर्लोक कैसे प्रभावित होता है?

संकर्षण की अग्नि त्रैलोक्य को भस्म करती है और उसका भयंकर ताप महर्लोक तक पहुँचता है। महर्लोक भस्म नहीं होता पर असहनीय ताप से निर्जन हो जाता है।

#संकर्षण#महर्लोक#ताप
लोक

महर्लोक की 'कृतकाकृतक' प्रकृति का क्या अर्थ है?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी (कृतक) + आंशिक रूप से अविनाशी (अकृतक)। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है — यही इसकी मिश्र प्रकृति है।

#कृतकाकृतक#महर्लोक#विष्णु पुराण
लोक

महर्लोक को 'कृतकाकृतक' क्यों कहते हैं?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी + आंशिक रूप से अविनाशी। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर निर्जन हो जाता है (कृतक)।

#कृतकाकृतक#महर्लोक#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में स्वर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण स्वर्लोक को कालगणना और प्रलय से जोड़ता है जबकि भागवत पुराण इसका विस्तृत भौगोलिक, खगोलीय और भक्ति-दृष्टिकोण से वर्णन करता है।

#विष्णु पुराण#भागवत पुराण#स्वर्लोक
लोक

स्वर्ग से पुण्य क्षीण होने का संकेत क्या है?

स्वर्ग में पुण्य क्षीण होने के दो संकेत हैं — शरीर से पसीना आना और गले की दिव्य माला का मुरझाना। ये संकेत मिलते ही स्वर्ग से निष्कासन निश्चित है।

#पुण्य क्षीण#स्वर्ग#माला मुरझाना
लोक वर्णन

सात लोक कौन से हैं और उनका क्या वर्णन?

7 ऊर्ध्व लोक: भूलोक→भुवर्लोक→स्वर्लोक→महर्लोक→जनलोक→तपलोक→सत्यलोक (ब्रह्मलोक)। 7 अधो लोक (पाताल): अतल→वितल→सुतल→तलातल→महातल→रसातल→पाताल। विष्णु पुराण और भागवत पुराण में विस्तृत वर्णन। कुल 14 लोक।

#सात लोक#चौदह लोक#ऊर्ध्व लोक
लोक

विष्णु पुराण के 'गायन्ति देवाः' श्लोक का क्या अर्थ है?

'गायन्ति देवाः' श्लोक में देवता कहते हैं — भारतवर्ष में जन्म लेने वाले हमसे भी धन्य हैं क्योंकि यह स्वर्ग और मोक्ष दोनों का द्वार है जो हमें भी दुर्लभ है।

#गायन्ति देवाः#विष्णु पुराण#भारतवर्ष
लोक

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में भूलोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण भारतवर्ष के आध्यात्मिक महत्व और मोक्ष पर बल देता है जबकि भागवत पुराण गणितीय माप, शासकों की वंशावली और प्रत्येक वर्ष के अधिष्ठाता देव का विस्तृत वर्णन करता है।

#विष्णु पुराण#भागवत पुराण#भूलोक
लोक

देवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?

देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।

#देवता#भारतवर्ष#जन्म
लोक

भारतवर्ष को सबसे श्रेष्ठ क्यों माना गया है?

भारतवर्ष एकमात्र कर्मभूमि है जहाँ मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य वर्ष केवल भोगभूमि हैं। यहाँ चारों युग होते हैं और नए कर्म करने की स्वतंत्रता है।

#भारतवर्ष#कर्मभूमि#मोक्ष
लोक

नैमित्तिक प्रलय में सात सूर्यों का क्या काम है?

प्रलय में सूर्य की सात रश्मियाँ सात प्रलयंकारी सूर्य बन जाती हैं जिनकी प्रचंड अग्नि से पहले भूलोक फिर भुवर्लोक और फिर स्वर्लोक भस्म हो जाते हैं।

#सात सूर्य#नैमित्तिक प्रलय#भुवर्लोक
लोक

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में भुवर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण भुवर्लोक का खगोलीय और गणितीय वर्णन करता है जबकि भागवत पुराण इसके निवासियों, उप-लोकों और भगवान के विराट स्वरूप में इसकी नाभि-स्थिति का विस्तृत वर्णन करता है।

#विष्णु पुराण#भागवत पुराण#भुवर्लोक
लोक

पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी कितनी बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी एक लाख योजन (लगभग आठ लाख मील) है और इसी बीच के आकाश में भुवर्लोक फैला हुआ है।

#पृथ्वी#सूर्यमंडल#एक लाख योजन
लोक

विष्णु पुराण में भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार कितना बताया गया है?

विष्णु पुराण के अनुसार भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार बिल्कुल भूलोक (पृथ्वी) के ही समान है। दोनों का घेरा एक जैसा है।

#विष्णु पुराण#भुवर्लोक#क्षैतिज विस्तार
विष्णु उपासना

विष्णु पुराण में कितने अध्याय हैं?

विष्णु पुराण में कुल 6 अंश (खण्ड) हैं। इसकी रचना महर्षि पराशर ने की है और इसमें लगभग 7,000 श्लोक उपलब्ध हैं। इसमें सृष्टि, ध्रुव-प्रह्लाद कथा, राजवंश, श्रीकृष्ण चरित्र और मोक्ष का वर्णन है। 18 पुराणों में आकार में सबसे छोटा पर महत्व में उच्च है।

#विष्णु पुराण#पुराण अध्याय#पराशर ऋषि
लोक वर्णन

सात पाताल लोक कौन से हैं?

7 पाताल (ऊपर→नीचे): अतल (बल), वितल (शिव/हाटकेश्वर), सुतल (राजा बलि — विष्णु द्वारपाल), तलातल (मायासुर), महातल (नाग), रसातल (दैत्य), पाताल (शेषनाग — स्वर्णमयी)। विष्णु/भागवत पुराण। ये नर्क नहीं, स्वर्ग से भी सुंदर।

#सात पाताल#अधो लोक#विष्णु पुराण
लोक

समुद्र मंथन किस पुराण में है?

समुद्र मंथन श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और महाभारत में वर्णित है।

#समुद्र मंथन पुराण#श्रीमद्भागवत#विष्णु पुराण
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में गरीब के लिए क्या विकल्प है?

गाय को घास या श्रद्धा-प्रार्थना।

#गरीब श्राद्ध#विष्णु पुराण#घास
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में योगी को भोजन कराने का फल क्या है?

हजार ब्राह्मण भोजन से भी श्रेष्ठ।

#योगी भोजन#त्रयोदशी#विष्णु पुराण
लोक

राजा सगर और और्व संवाद क्या है?

श्राद्ध तत्त्व और योगी भोजन का संवाद।

#राजा सगर#और्व ऋषि#विष्णु पुराण
लोक

बिना धन के श्राद्ध कैसे करें?

श्रद्धा, घास दान या प्रार्थना से।

#बिना धन श्राद्ध#श्रद्धा#विष्णु पुराण
लोक

गरीब व्यक्ति त्रयोदशी श्राद्ध कैसे करे?

गाय को घास या श्रद्धा-प्रार्थना से।

#गरीब श्राद्ध#विष्णु पुराण#घास
लोक

विष्णु पुराण में पुरूरवा संवाद क्या है?

श्राद्ध काल और सरल विकल्पों का संवाद।

#पुरूरवा#सनत्कुमार#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण में त्रयोदशी श्राद्ध क्या बताता है?

त्रयोदशी अनंत पुण्यदायी बताई गई है।

#विष्णु पुराण#त्रयोदशी#पुरूरवा
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराणों और धर्मशास्त्रों में इसका आधार है।

#गरुड़ पुराण#विष्णु पुराण#मत्स्य पुराण
लोक

दशमी श्राद्ध में पितरों की आकांक्षा क्या है?

पिण्डदान और पायस अर्पण की आकांक्षा।

#पितृ आकांक्षा#विष्णु पुराण#पायस
लोक

दशमी श्राद्ध में बासी अन्न क्यों वर्जित है?

बासी अन्न श्राद्ध को अपवित्र करता है।

#बासी अन्न#श्राद्ध निषेध#विष्णु पुराण
लोक

पितरों को पायस क्यों प्रिय है?

क्योंकि यह पितृ तृप्ति देता है।

#पायस#पितृ तृप्ति#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण में पितृ गाथा क्या है?

पितरों की श्राद्ध-आकांक्षा का वर्णन।

#विष्णु पुराण#पितृ गाथा#श्राद्ध
लोक

दशमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराणों और स्मृतियों में इसका आधार है।

#गरुड़ पुराण#विष्णु पुराण#याज्ञवल्क्य स्मृति
लोक

विष्णु पुराण में योगी भोजन का फल क्या है?

हजार ब्राह्मण भोजन जैसा पुण्य।

#विष्णु पुराण#योगी#श्राद्ध भोज
लोक

नवमी श्राद्ध से आत्मा को कौन सी गति मिलती है?

आत्मा को ऊर्ध्व गति मिलती है।

#आत्मा#ऊर्ध्व गति#विष्णु पुराण
लोक

नवमी श्राद्ध में योगी को भोजन कराने का फल क्या है?

हजार ब्राह्मण भोजन के समान फल।

#योगी भोजन#विष्णु पुराण#श्राद्ध फल
लोक

अष्टमी श्राद्ध में सात्विक अन्न क्यों जरूरी है?

सात्विक अन्न पितृ तृप्ति के लिए श्रेष्ठ है।

#सात्विक अन्न#श्राद्ध भोजन#विष्णु पुराण
लोक

अष्टमी श्राद्ध में ब्राह्मण भोज क्यों जरूरी है?

ब्राह्मण भोज पितृ तृप्ति का मुख्य भाग है।

#ब्राह्मण भोज#श्राद्ध#विष्णु पुराण
लोक

अष्टमी श्राद्ध में सेंधा नमक क्यों?

श्राद्ध भोजन में सेंधा नमक प्रशस्त है।

#सेंधा नमक#श्राद्ध भोजन#विष्णु पुराण
लोक

गरीब व्यक्ति सप्तमी श्राद्ध कैसे करे?

धन न हो तो तिल-जल या श्रद्धा से प्रार्थना करके श्राद्ध करें।

#गरीब श्राद्ध#विष्णु पुराण#तिल जल
लोक

गरीब व्यक्ति श्राद्ध कैसे करे?

सामर्थ्य न हो तो गाय को घास खिलाकर या श्रद्धा से प्रणाम कर श्राद्ध किया जा सकता है।

#गरीब श्राद्ध#विष्णु पुराण#श्रद्धा
लोक

कैसा ब्राह्मण भोजन कराएँ?

वेदज्ञ, सुयोग्य और आत्मज्ञानी ब्राह्मण को भोजन कराना श्रेष्ठ है।

#योग्य ब्राह्मण#श्राद्ध भोज#विष्णु पुराण
लोक

भारत भूमि में श्राद्ध क्यों श्रेष्ठ है?

भारतभूमि में श्राद्ध को देवताओं तक ने दुर्लभ और मोक्षदायी माना है।

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लोक

विष्णु पुराण में तृतीया का महत्व क्या है?

विष्णु पुराण तृतीया को अनंत पुण्यदायी तिथि मानता है।

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लोक

तृतीया श्राद्ध मोक्ष से कैसे जुड़ा है?

तृतीया श्राद्ध पितरों की ऊर्ध्वगति और मोक्षमार्ग से जुड़ा है।

#मोक्ष#तृतीया श्राद्ध#विष्णु पुराण
श्राद्ध दर्शन

क्या गाय को चारा खिलाकर श्राद्ध किया जा सकता है?

हाँ, विष्णु पुराण के अनुसार गाय को चारा खिलाकर भी श्राद्ध किया जा सकता है। यदि किसी के पास तिल-जल जितनी भी सामग्री नहीं है, तो वह कहीं से एक दिन का चारा लाकर श्रद्धापूर्वक गाय को खिला दे, और इससे श्राद्ध की पूर्ति हो जाती है। गाय पवित्रता और देवत्व का प्रतीक है।

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श्राद्ध दर्शन

क्या तिल और जल से श्राद्ध हो सकता है?

हाँ, विष्णु पुराण के अनुसार तिल और जल से भी श्राद्ध हो सकता है। यदि किसी के पास पिण्डदान या ब्राह्मण भोजन के लिए धन-सामग्री नहीं है, तो वह केवल थोड़ा सा कच्चा धान या एक मुट्ठी तिल अंजलि में जल के साथ लेकर किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को दान कर दे। श्राद्ध श्रद्धा से होता है, मात्रा से नहीं।

#तिल जल श्राद्ध#निर्धन विकल्प#विष्णु पुराण
श्राद्ध दर्शन

गरीब आदमी श्राद्ध कैसे करे?

विष्णु पुराण में निर्धन व्यक्तियों के लिए तीन करुणामय विकल्प हैं। पहला, थोड़ा सा कच्चा धान या एक मुट्ठी तिल जल के साथ ब्राह्मण को दान। दूसरा, गाय को एक दिन का चारा श्रद्धापूर्वक खिलाना। तीसरा, एकांत वन में आकाश की ओर भुजाएं उठाकर पितरों से अश्रुपूर्ण श्रद्धा से प्रार्थना। श्राद्ध श्रद्धा से होता है, धन से नहीं।

#निर्धन श्राद्ध#विष्णु पुराण विकल्प#करुणा
श्राद्ध दर्शन

क्या बेईमानी के पैसे से श्राद्ध कर सकते हैं?

नहीं, बेईमानी के पैसे से श्राद्ध नहीं कर सकते। मार्कण्डेय और विष्णु पुराण के अनुसार अन्याय, छल-कपट या भ्रष्टाचार से अर्जित धन से किया गया श्राद्ध पितरों को स्वर्ग नहीं पहुँचाता, बल्कि वह नीच योनियों में पड़े जीवों को प्राप्त होता है, और पितर क्षुधा से पीड़ित रहते हैं।

#बेईमानी का धन#अशुद्ध धन#श्राद्ध वर्जित
श्राद्ध दर्शन

श्राद्ध किस धन से करना चाहिए?

विष्णु पुराण के अनुसार श्राद्ध सदैव न्याय और ईमानदारी से कमाए गए धन से ही करना चाहिए। अन्याय, छल-कपट या भ्रष्टाचार से अर्जित धन से किया गया श्राद्ध पितरों को स्वर्ग नहीं पहुँचाता, बल्कि वह नीच योनियों में पड़े जीवों को प्राप्त होता है, और पितर क्षुधा से पीड़ित रहते हैं।

#न्यायोपार्जित धन#ईमानदारी#विष्णु पुराण
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