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ग्रन्थ

विष्णु पुराण(95)

विष्णु पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 95 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध विधि

पितरों को कौन सी चीज़ें प्रिय हैं?

विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार पितरों को तिल, कुशा, गाय का दूध, शहद, जौ और सफेद फूल अत्यंत प्रिय हैं। तिल और कुशा भगवान वराह के दिव्य शरीर से उत्पन्न हुए हैं। ये छह चीज़ें श्राद्ध में अनिवार्य रूप से प्रयोग की जाती हैं।

#पितर प्रिय#तिल कुशा दूध#विष्णु पुराण
लोक

पितर संध्या समय अधिक शक्तिशाली क्यों माने जाते हैं?

ब्रह्मा के त्यक्त शरीर से संध्या बनने के कारण पितरों का संध्या काल से विशेष संबंध माना गया है।

#पितर संध्या समय#संध्या#पितृ शक्ति
लोक

विष्णु पुराण में पितरों की उत्पत्ति का क्या वर्णन है?

विष्णु पुराण के अनुसार पितर ब्रह्मा के पृष्ठ भाग से उत्पन्न हुए और उनके त्यक्त शरीर से संध्या बनी।

#विष्णु पुराण#पितर उत्पत्ति#ब्रह्मा
लोक

पितरों की उत्पत्ति कैसे हुई मानी गई है?

विष्णु पुराण में पितरों की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के पृष्ठ भाग से बताई गई है।

#पितरों की उत्पत्ति#विष्णु पुराण#ब्रह्मा
लोक

गर्भपात करवाने वाले को शास्त्रों में क्या दंड बताया गया है?

गर्भपात करवाने वाला घोर यातना के बाद प्रेत योनि प्राप्त कर सकता है और पुनर्जन्म में रोगी या नीच अवस्था पा सकता है।

#गर्भपात#प्रेत योनि#विष्णु पुराण
लोक

झूठी गवाही देने वाले को कौन सी गति मिलती है?

झूठी गवाही देने वाला घोर यातना के बाद प्रेत योनि और बारंबार पिशाच योनि प्राप्त कर सकता है।

#झूठी गवाही#कूटसाक्ष्य#प्रेत योनि
लोक

माता-पिता का अपमान करने वाले को क्या फल मिलता है?

माता-पिता और गुरुजनों का तिरस्कार करने वाला कालसूत्र नरक की यातना और आगे प्रेत योनि जैसी गति पा सकता है।

#माता पिता अपमान#कालसूत्र नरक#प्रेत योनि
लोक

विष्णु भक्तों को यमदूत क्यों नहीं ले जाते?

विष्णु भक्तों पर यमराज का अधिकार नहीं होता; उन्हें यमदूत नहीं, विष्णुदूत सीधे वैकुण्ठ ले जाते हैं।

#विष्णु भक्त#यमदूत#वैष्णव
लोक

विष्णु पुराण में नरकों का वर्णन कैसे है?

विष्णु पुराण में पराशर मुनि रौरव, रोध, सूकर, तप्तकुण्ड आदि नरकों और उनके पाप-दंड का वर्णन करते हैं।

#विष्णु पुराण#नरक#दंड विधान
लोक

यमराज भगवान विष्णु के प्रतिनिधि कैसे हैं?

यमराज भगवान विष्णु की दण्ड व्यवस्था के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।

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लोक

यमराज सूर्यपुत्र कैसे हैं?

यमराज सूर्य विवस्वान के पुत्र माने गए हैं; इसलिए उनका एक नाम वैवस्वत भी है।

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लोक

यमलोक को पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में कैसे समझाया गया है?

पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में यमलोक कर्म-फल, न्याय और यातना-देह द्वारा कर्म-शोधन का निश्चित पारलौकिक आयाम है।

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लोक

विष्णु पुराण में अधोलोकों के नाम क्या हैं?

विष्णु पुराण में अधोलोकों के नाम अतल, वितल, नितल, गभस्तिमान, महातल, सुतल और पाताल बताए गए हैं।

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लोक

नारद जी ने पाताल लोक के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने पाताल को ऐश्वर्य, इंद्रिय-सुख और भव्यता में स्वर्ग से भी उत्तम बताया।

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लोक

पाताल लोक की भूमि कैसी बताई गई है?

पाताल की भूमियाँ श्वेत, काली, अरुण, पीली, कंकरीली, पथरीली और स्वर्णमयी बताई गई हैं।

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लोक

विष्णु पुराण में महातल कैसे बताया गया है?

विष्णु पुराण में महातल पांचवां पाताल है और पाताल लोकों को स्वर्ग से भी सुंदर बताया गया है।

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लोक

विष्णु पुराण में रसातल कैसे बताया गया है?

विष्णु पुराण में रसातल को गभस्तिमत् या निताल के समतुल्य माना गया है और इसकी भूमि अश्ममयी बताई गई है।

#विष्णु पुराण#रसातल#गभस्तिमत्
लोक

नारद जी ने पाताल लोकों के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने कहा कि पाताल लोक स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और श्रेष्ठ हैं।

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लोक

वितल लोक में सूर्य की गर्मी क्यों नहीं सताती?

वितल में सूर्य की किरणें केवल प्रकाश देती हैं, गर्मी और संताप नहीं देतीं।

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लोक

वितल लोक की भूमि कैसी है?

वितल लोक की भूमि कृष्ण वर्ण यानी काले रंग की बताई गई है।

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लोक

सुतल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश कैसे होता है?

सुतल में सूर्य-चंद्र का प्रत्यक्ष प्रकाश नहीं आता; नाग-मणियाँ प्रकाश देती हैं और अप्रत्यक्ष किरणें बिना गर्मी या ठंड के प्रभाव देती हैं।

#सुतल सूर्य चंद्र#सुतल प्रकाश#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण में तलातल को किस नाम से बताया गया है?

विष्णु पुराण में तलातल को गभस्तिमत् कहा गया है।

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लोक

तलातल का प्रकाश सूर्य जैसा क्यों नहीं है?

तलातल का प्रकाश मृदु और सुखद है, उसमें सूर्य जैसी तपन नहीं होती।

#तलातल प्रकाश#सूर्य#तपन
लोक

सात अधोलोकों की मिट्टी के रंग कौन-कौन से हैं?

अधोलोकों की मिट्टी श्वेत, कृष्ण, अरुण, पीत, शर्करा, अश्म और सुवर्णमयी बताई गई है।

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लोक

गभस्तिमत् क्या है?

गभस्तिमत् तलातल लोक का नाम है, जो चौथे अधोलोक के लिए प्रयुक्त हुआ है।

#गभस्तिमत्#तलातल#विष्णु पुराण
लोक

तलातल की भूमि पीली क्यों कही गई है?

तलातल की भूमि शास्त्रों में पीत यानी पीले रंग की बताई गई है।

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लोक

विष्णु पुराण में तलातल लोक कैसे बताया गया है?

विष्णु पुराण में तलातल को गभस्तिमत् नाम से पीली स्वर्णिम भूमि वाला चौथा अधोलोक बताया गया है।

#विष्णु पुराण#तलातल#गभस्तिमत्
लोक

तलातल लोक का वर्णन किन पुराणों में मिलता है?

तलातल का वर्णन भागवत, विष्णु, ब्रह्माण्ड, वायु, शिव, मत्स्य, मार्कण्डेय और देवी भागवत पुराण में मिलता है।

#तलातल पुराण#भागवत पुराण#विष्णु पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

विष्णु पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की गति क्या बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार आत्मा मृत्यु के तुरंत बाद यमलोक नहीं जाती, बल्कि घर-परिवार के पास रहती है और आगे कर्म व संस्कारों के अनुसार उसकी गति होती है।

#विष्णु पुराण#आत्मा की गति#मृत्यु के बाद
लोक

जनलोक किस धर्म ग्रंथों में बताया गया है?

जनलोक का वर्णन भागवत पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, ब्रह्मांड पुराण, स्कंद पुराण, मार्कण्डेय पुराण और गरुड़ पुराण में मिलता है।

#जनलोक#श्रीमद्भागवत पुराण#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण में द्वादशाक्षर मंत्र का क्या महत्व बताया गया है?

द्वादशाक्षर मंत्र का चिंतन करने वाले ज्ञानी योगी ऊर्ध्व लोकों को प्राप्त कर पुनः नहीं लौटते।

#द्वादशाक्षर मंत्र#ॐ नमो भगवते वासुदेवाय#विष्णु पुराण
लोक

विष्णु पुराण के अनुसार सूर्य से ध्रुवलोक तक की दूरी कैसे समझाई गई है?

विष्णु पुराण में ग्रहों और सप्तर्षिमण्डल के क्रम से ध्रुवलोक को सूर्य से अड़तीस लाख योजन ऊपर बताया गया है।

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भागवत पुराण और विष्णु पुराण में तपोलोक की दूरी क्या समान है?

हाँ, दोनों पुराण तपोलोक को जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताते हैं।

#भागवत पुराण#विष्णु पुराण#तपोलोक
लोक

श्रीविष्णु पुराण में तपोलोक की दूरी कैसे बताई गई है?

विष्णु पुराण तपोलोक को जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताता है।

#श्रीविष्णु पुराण#तपोलोक दूरी#जनलोक
लोक

तपोलोक की दूरी कितनी बताई गई है?

तपोलोक जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताया गया है।

#तपोलोक दूरी#योजन#जनलोक
लोक

विष्णु पुराण में सत्यलोक का क्या वर्णन है?

विष्णु पुराण सत्यलोक की सटीक दूरियाँ, 88,000 ऊर्ध्वरेता मुनियों की संख्या और सूर्य के प्रकाश के निस्तेज होने पर बल देता है।

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लोक

सत्यलोक में कितने मुनि रहते हैं?

विष्णु पुराण के अनुसार सत्यलोक में 88,000 ऊर्ध्वरेता मुनि रहते हैं जो माया से मुक्त और साक्षात मूर्त वेद कहलाते हैं।

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लोक

क्या सत्यलोक में सूर्य का प्रकाश पहुँचता है?

सूर्य का प्रकाश सत्यलोक तक पहुँचता तो है पर ब्रह्मा की असीम कांति के सामने निस्तेज हो जाता है — जैसे सूर्य के सामने दीपक।

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लोक

सत्यलोक में प्रकाश कहाँ से आता है?

सत्यलोक में भगवान ब्रह्मा की असीम कांति और सत्यलोक की स्वयंप्रभा प्रकाश का स्रोत है। सूर्य का प्रकाश यहाँ पहुँचकर निस्तेज हो जाता है।

#सत्यलोक#प्रकाश#ब्रह्मा कांति
लोक

देवर्षि नारद ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

विष्णु पुराण में नारद जी ने देव-सभा में कहा कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है।

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लोक

नारद जी ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने स्वर्ग की सभा में कहा कि पाताल का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है। उन्होंने रंग-बिरंगी भूमि, रत्न-महल और मधुर संगीत का वर्णन किया।

#नारद#अतल लोक#स्वर्ग
क्षीरसागर मंथन

अलक्ष्मी का निवास कहाँ होता है?

विष्णु पुराण: अलक्ष्मी का निवास — अतिथि का अपमान, गंदे घर, कलह, वेद-धर्म की निंदा और पूजाहीन स्थान। श्रीसूक्त: 'अलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्' — अलक्ष्मी का निष्कासन किए बिना श्री की प्राप्ति असंभव।

#अलक्ष्मी निवास#अतिथि अपमान#गंदा घर
लक्ष्मी-नारायण तत्त्व

विष्णु पुराण में लक्ष्मी और विष्णु के संबंध को किस रूपक से समझाया है?

अग्नि और उसकी उष्णता का रूपक — जैसे अग्नि से उसकी गर्मी अलग नहीं की जा सकती, वैसे विष्णु से लक्ष्मी पृथक नहीं। विष्णु = पुरुष तत्त्व (चेतना), लक्ष्मी = स्त्री तत्त्व (क्रियाशील ऊर्जा)।

#अग्नि उष्णता रूपक#विष्णु पुराण#पराशर मुनि
पूजा विधि एवं नियम

रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

#तुलसी#रविवार#तुलसी नियम
ऋषि परंपरा

सप्तऋषियों के नाम और उनकी पूजा का विधान क्या है?

विष्णु पुराण के अनुसार वर्तमान मन्वंतर के सप्तऋषि: वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज। भाद्रपद शुक्ल पंचमी (ऋषि पंचमी) को इनकी पूजा से पाप कर्म नष्ट होते हैं।

#सप्तऋषि#सात ऋषि#ऋषि पंचमी
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