विस्तृत उत्तर
वितल लोक की भूमि कृष्ण वर्ण, अर्थात काले रंग की बताई गई है। श्री विष्णु पुराण में सातों अधोलोकों की भूमियों के रंग और प्रकृति का सूक्ष्म वर्णन मिलता है। इनके अनुसार लोकों की भूमियाँ क्रमशः शुक्ल, कृष्ण, अरुण, पीत, शर्करामयी, शैलमयी और सुवर्णमयी हैं। इस क्रम में द्वितीय लोक होने के कारण वितल लोक की भूमि मुख्य रूप से कृष्ण वर्ण की है। यद्यपि भूमि काले रंग की है, फिर भी देवशिल्पी विश्वकर्मा और असुर शिल्पी मयासुर द्वारा निर्मित भव्य, अलौकिक और रत्नों से जड़े प्रासाद, मंदिर, भवन और क्रीड़ांगन इस लोक को अनंत शोभा से युक्त कर देते हैं।
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