विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण (२.७) और अन्य शास्त्रों के अनुसार सत्यलोक में छियासी हजार (88,000) ऐसे महान मुनि निवास करते हैं जो ऊर्ध्वरेता हैं। ये वे सिद्ध और परम विरक्त ब्रह्मचारी हैं जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन में अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन किया और अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को आध्यात्मिक तेज में परिवर्तित कर लिया है। यह अखण्ड ब्रह्मचर्य, योग और तपस्या ही उन्हें इस भौतिक ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च शिखर पर निवास करने का अधिकार प्रदान करती है। श्रीमद्भागवत (१.१९.२३) में स्पष्ट उल्लेख है कि सत्यलोक के ये निवासी पूर्णतः वैदिक ज्ञान से ओतप्रोत होते हैं और वे साक्षात मूर्त वेद कहलाते हैं।
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