तीर्थ स्थलपंचभूत स्थल मंदिर कौन से?पृथ्वी=कांचीपुरम, जल=तिरुवनैक्कावल(त्रिची), अग्नि=तिरुवण्णामलई, वायु=श्रीकालहस्ती, आकाश=चिदंबरम। 5 शिव मंदिर = 5 तत्व = शरीर शुद्धि। दक्षिण तीर्थ।#पंचभूत#5 तत्व#शिव
तंत्र साधनाअघोरी साधक शव साधना क्यों करते हैं — इसका रहस्य क्या है?'सबमें शिव' — शव = शिव रूप। भय नाश (मृत्यु भय), अहंकार शून्य, द्वंद्व नाश (अद्वैत), ऊर्जा ग्रहण। अत्यंत उन्नत — सामान्य के लिए नहीं। गुरु+कानूनी।#अघोरी#शव साधना#रहस्य
शिव ध्यानशिव ध्यान में आज्ञा चक्र पर ध्यान क्यों लगाते हैं?शिव का तीसरा नेत्र = आज्ञा चक्र। इड़ा+पिंगला = सुषुम्ना मिलन (अद्वैत = शिव)। बीज मंत्र 'ॐ' = शिव मंत्र। सहस्रार (शिव) का प्रवेश द्वार। मन शांत = शिव अवस्था।#आज्ञा चक्र#तीसरा नेत्र#कारण
शिव तत्त्वशिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
सृष्टि तत्त्वशिव बीजी, ब्रह्मा बीज और विष्णु योनि कैसे हैं?विष्णु ने कहा कि शिव बीजवान् हैं, ब्रह्मा बीज हैं और वे स्वयं योनि हैं; शिव के लिंग से निकला बीज विष्णु की योनि में गिरा।#बीजी#बीज#योनि
शिवमाहात्म्यशिव को जगत का कारण क्यों कहा गया?विष्णु ने शिव को जगत का कारण, प्राचीन पुरुष, सभी कारणों का मूल बीज, निर्विकार और एकमात्र ज्योति कहा।#शिव#जगत कारण#प्राचीन पुरुष
वरदानविष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।#विष्णु#शिव#वरदान
ब्रह्मा-विष्णुब्रह्मा और विष्णु शिव से कैसे जुड़े हैं?महादेव ने कहा कि ब्रह्मा उनके दाएँ अंग से और विश्वात्मा विष्णु उनके बाएँ अंग से उत्पन्न हुए हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्वशिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।#सृष्टि#पालन#संहार
शिव नामशिव को वेदशास्त्ररूप क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को वेदशास्त्ररूप, भुवनेशदेव, वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ कहा गया है।#वेदशास्त्ररूप#भुवनेशदेव#वेदगर्भ
शिव नामशिव को गणों का स्वामी क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को गणों का अधिपति कहा गया है और उसी के साथ उन्हें गंधी तथा गुहा से भी गुह्यतम रुद्र कहा गया है।#गणों के अधिपति#रुद्र#गुह्यतम
शिव नामवेदगर्भ और विश्वगर्भ क्या हैं?वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ शिव के नामों के रूप में आए हैं; उन्हें वेदशास्त्ररूप और भुवनेशदेव भी कहा गया है।#वेदगर्भ#विश्वगर्भ#गर्भरूप
शिव नामपार्वतीपति और उमापति कौन हैं?पार्वतीपति और उमापति शिव को कहा गया है; उसी स्थान पर उन्हें हिरण्यबाहु और सुवर्णवीर्य भी नमस्कार किया गया है।#पार्वतीपति#उमापति#हिरण्यबाहु
शिव रूपनीलकंठ शिव कैसे हैं?शिव को ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य, चैतन्यरूप, नीलकंठ, नीलकेश और शितिकंठ कहा गया है।#नीलकंठ#शितिकंठ#नीलकेश
शिव रूपअर्धनारीश्वर रूप क्या है?अर्धनारीश्वर रूप में शिव को अर्धनारी का शरीर धारण करने वाला, अव्यक्त और ग्यारह रूपों में परिवर्तित स्थाणु कहा गया है।#अर्धनारीश्वर#अव्यक्त#स्थाणु
प्रणव रूपशिव ओंकार और सर्वज्ञ कैसे हैं?स्तुति में शिव को भगवान्, सर्पों के पति, ओंकार और सर्वज्ञ कहा गया है।#ओंकार#सर्वज्ञ#शिव
सृष्टि-पालन-संहारशिव सृष्टि, पालन, संहार कैसे करते हैं?शिव को जल के मध्य स्थित, ब्रह्मा-विष्णु के मध्य प्रकाशमान, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता और मृत्युस्वरूप ईश्वर कहा गया है।#सृष्टि#पालन#संहार
विश्वव्यापक शिवशिव पंचभूतों में कैसे हैं?शिव को जल, वायु, तेज, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त रूप से नमस्कार किया गया है।#पंचभूत#शिव#जल
प्रणव रूपअकार, उकार, मकार क्या हैं?अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।#अकार#उकार#मकार
विष्णु स्तुतिविष्णु स्तुति क्या है?विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
शब्दमय शिवअक्षरों से शिव का शरीर कैसे बताया गया है?अक्षरों से शिव के अंग बताए गए हैं: अकार मस्तक, आकार ललाट, इकार-ईकार नेत्र, मकार हृदय, हकार आत्मा और क्षकार क्रोध कहा गया है।#अक्षर शरीर#शिव#वर्णमाला
त्रिदेव और ओम्ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
प्रणव ओम्अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#अकार#उकार#मकार
अघोर मंत्रअघोर मंत्र का रोज जप क्यों करें?सभी पापों से मुक्ति के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अघोर मंत्र का नित्य जप करने के लिए कहा गया है।#अघोर मंत्र#नित्य जप#द्विज
अघोर मंत्रअघोर मंत्र क्यों जपा जाता है?अघोर मंत्र सभी प्रकार के पातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक और अनेक पापों की शुद्धि के लिए जपा जाता है।#अघोर मंत्र#अघोरेश्वर#शिव
अघोर महिमाअघोर शिव कौन हैं?अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।#अघोर#शिव#महादेव
तत्पुरुष महिमातत्पुरुष शिव कौन हैं?तत्पुरुष शिव पीतवासा कल्प में पीतवस्त्रधारी परमेश्वर रूप से प्रकट हुए महादेव हैं।#तत्पुरुष#शिव#महादेव
वामदेव महिमावामदेव शिव कौन हैं?वामदेव शिव रक्तकल्प में लाल कुमार के रूप में प्रकट हुए परमेश्वर हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने साक्षात् देवेश्वर और ब्रह्मस्वरूप जाना।#वामदेव#शिव#महादेव
ब्रह्मा और सद्योजातब्रह्मा ने शिव को कुमार रूप में कैसे देखा?ब्रह्मा समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तभी उन्होंने शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार को देखा।#ब्रह्मा#कुमार रूप#सद्योजात
सद्योजात महिमासद्योजात शिव कौन हैं?सद्योजात शिव को ब्रह्मा ने श्वेतलोहित कुमार रूप में देखा और साक्षात् परमेश्वर तथा परात्पर ब्रह्म जाना।#सद्योजात#शिव#महेश्वर
श्रद्धा और शिवदर्शनब्रह्मा को शिव ने भक्तिभाव कैसे दिया?ब्रह्मा ने हृदय में शिव को देखा और अचल भक्ति माँगी; शिव ने उन्हें वह भक्तिभाव प्रदान किया।#ब्रह्मा#भक्तिभाव#अचल भक्ति
ब्रह्मा और शिव संवादब्रह्मा ने शिव से क्या पूछा था?ब्रह्मा ने पूछा कि शिव किस प्रकार वश में होते हैं और उनका ध्यान कहाँ करना चाहिए।#ब्रह्मा#शिव#महादेव
वाराणसी और पार्वती प्रश्नकाशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?वाराणसीपुरी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, जहाँ शिव और रुद्राणी का संवाद बताया गया है।#काशी#वाराणसी#अविमुक्त क्षेत्र
वाराणसी और पार्वती प्रश्नवाराणसी में पार्वती ने शिव से क्या पूछा?पार्वती ने पूछा कि तप, विद्या, योग आदि किस साधन से शिव वश में होते, पूजित होते और दर्शन देते हैं।#वाराणसी#पार्वती#शिव
शिवभक्तिशिवभक्त के दर्शन से क्या फल मिलता है?शिवभक्तों के दर्शनमात्र से प्राणियों को स्वर्ग आदि लोक सहज सुलभ हो जाते हैं।#शिवभक्त#दर्शन#स्वर्ग
शिव प्रसन्नताशिव किन लोगों पर प्रसन्न होते हैं?शिव संत, जितेन्द्रिय, धर्मज्ञ, साधु, आचार्य, दयावान्, तपस्वी, वैराग्यपरायण, ज्ञानी, दानी और सत्यवादी लोगों पर प्रसन्न होते हैं।#शिव#महेश्वर#संत
योग बाधाएँयोग में श्रद्धा क्यों जरूरी है?योग के साधन, साध्य, गुरु, ज्ञान, आचार और शिव में श्रद्धा न होना अश्रद्धा है, जो योग में बाधा बनती है।#श्रद्धा#अश्रद्धा#गुरु
योग अभ्यासयोग शुरू करने से पहले किसे प्रणाम करना चाहिए?योग शुरू करने से पहले गुरु, शिव, पार्वती, गणेश और शिष्यों सहित योगीश्वरों को प्रणाम करना चाहिए।#योग आरम्भ#गुरु प्रणाम#शिव
पाशुपत योगपाशुपत योग किसने प्रवर्तित किया?पाशुपत योग पशुपति रुद्र ने प्रवर्तित किया।#पाशुपत योग#पशुपति रुद्र#शिव
पाशुपत योगपाशुपत योग क्या है?पाशुपत योग वह योग है जिसे पशुपति रुद्र ने सबको परम ऐश्वर्य दिलाने के लिए प्रवर्तित किया।#पाशुपत योग#पशुपति रुद्र#परम ऐश्वर्य
पाशुपत योगशिव को पशुपति क्यों कहा जाता है?देवता से पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं; उनके पति यानी स्वामी होने के कारण शिव पशुपति हैं।#पशुपति#शिव#पशु
माहेश्वर योगशिव योगमार्ग से प्राणियों पर अनुग्रह कैसे करते हैं?शिव का अनुग्रह योगावतारों, शिष्यों, प्रशिष्यों और शिष्य-परम्परा के माध्यम से योग में प्रवृत्ति कराने के रूप में बताया गया है।#शिव#योगमार्ग#अनुग्रह
शंकर नामनीललोहित नाम का अर्थ क्या है?नीला कण्ठ और लाल देह होने के कारण शिवजी नीललोहित कहलाते हैं।#नीललोहित#नीला कण्ठ#लाल देह
शंकर नामपिनाकी नाम का अर्थ क्या है?पिनाक नामक धनुष धारण करने के कारण शिवजी पिनाकी कहलाते हैं।#पिनाकी#पिनाक#धनुष
शंकर नामशंकर नाम का अर्थ क्या है?शंकर नाम का अर्थ कल्याण करने वाला बताया गया है।#शंकर#नाम अर्थ#कल्याण
शंकर महिमाशिव सबका कल्याण कैसे करते हैं?शिव दयार्द्र होकर प्राणियों का कल्याण करते हैं; उनकी आत्मा बिना प्रयत्न कल्याण करने वाली कही गई है।#शिव#कल्याण#शंकर
शंकर महिमाशिव स्थाणु क्यों कहलाए?रुद्रात्मक सृष्टि से निवृत्त होकर निष्कल आत्मा वाले शंकर अधिष्ठित हुए, इसलिए उनका स्थाणुत्व बताया गया।#शिव#स्थाणु#रुद्र
सृष्टिशिव ने मरणधर्मा सृष्टि पर क्या उत्तर दिया?शिव ने कहा कि मरणधर्मा सृष्टि करना उनकी स्थिति नहीं है; ब्रह्मा अपने इच्छानुसार मृत्युयुक्त प्रजा बनाएं।#शिव#शंकर#मरणधर्मा सृष्टि
सृष्टिब्रह्मा ने शिव से कैसी प्रजा बनाने को कहा?ब्रह्मा ने शिव से मरणधर्मा प्रजा बनाने को कहा, क्योंकि अमर प्रजा की सृष्टि उचित नहीं बताई।#ब्रह्मा#शिव#मरणधर्मा प्रजा