आत्मा सिद्धांतआत्महत्या करने वाले की आत्मा को क्या होता है?शास्त्रों में आत्महत्या महापाप है। ईशोपनिषद (3): आत्महन् अंधकारमय लोक प्राप्त करते हैं। गरुड़ पुराण: प्रेत योनि में भटकना। प्रारब्ध भोगने शेष रहता है। परिवार श्राद्ध-तर्पण कराए। मानसिक कष्ट में विशेषज्ञ से सहायता लें।#आत्महत्या#आत्मा#गरुड़ पुराण
विष्णु उपासनाविष्णु जी के वाहन का नाम क्या है?भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' है — पक्षियों के राजा, विनता और कश्यप ऋषि के पुत्र। गरुड़ की भक्ति और शक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें अपना वाहन बनाया। इसीलिए विष्णु को 'गरुड़वाहन' और 'गरुड़ध्वज' भी कहते हैं।#गरुड़ वाहन#विष्णु वाहन#गरुड़ पुराण
लोक वर्णनपितृ लोक क्या है और पितर वहाँ कैसे रहते हैं?पितृलोक भुवर्लोक/चंद्रलोक में स्थित है (विष्णु पुराण)। गीता (9.25): पितृ-भक्त पितृलोक जाते हैं। गरुड़ पुराण अनुसार कर्मों के आधार पर प्राप्त होता है। श्राद्ध-तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है। दक्षिण दिशा पितरों की।#पितृ लोक#पितर#श्राद्ध
लोकभूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।#भूलोक#मृत्यु#परलोक
पौराणिक ज्ञानअकाल मृत्यु होने पर आत्मा को क्या होता है?गरुड़ पुराण: अकाल मृत्यु = प्रेत योनि (शेष आयु तक भटकना), अधूरी इच्छाएँ। मुक्ति: चतुर्दशी श्राद्ध, नारायण बलि, गया पिंडदान, गरुड़ पुराण पाठ।#अकाल मृत्यु#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण
लोकत्रयोदशी श्राद्ध में अयोग्य ब्राह्मण कौन है?अंगहीन, रोगी या अनैतिक ब्राह्मण।#अयोग्य ब्राह्मण#गरुड़ पुराण#श्राद्ध निषेध
लोकत्रयोदशी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?पुराणों और धर्मशास्त्रों में इसका आधार है।#गरुड़ पुराण#विष्णु पुराण#मत्स्य पुराण
लोकगरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है?मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायवीय अवस्था।#प्रेत अवस्था#गरुड़ पुराण#मृत्यु
लोकएकादशी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?पुराण, स्मृति और श्राद्ध तत्त्व इसका आधार हैं।#शास्त्रीय आधार#गरुड़ पुराण#श्राद्ध तत्त्व
लोकगयाकूप श्लोक का अर्थ क्या है?गयाकूप पिण्डदान ब्रह्मलोक गति देता है।#गयाकूप श्लोक#गरुड़ पुराण#ब्रह्मलोक
लोकदशमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?पुराणों और स्मृतियों में इसका आधार है।#गरुड़ पुराण#विष्णु पुराण#याज्ञवल्क्य स्मृति
लोकअष्टमी श्राद्ध में वैतरणी का संबंध क्या है?दान आत्मा को वैतरणी पार कराने में सहायक है।#वैतरणी#गोदान#गरुड़ पुराण
लोकअष्टमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?पुराण, स्मृति और गृह्यसूत्र इसका आधार हैं।#शास्त्रीय आधार#गरुड़ पुराण#याज्ञवल्क्य स्मृति
लोकसप्त पितृगण कौन हैं?बर्हिषद, अग्निष्वात्त, क्रव्याद, आज्यप, सुकलिन, उपहूत और साध्य सप्त पितृगण हैं।#सप्त पितृगण#गरुड़ पुराण#पितर
लोकगरुड़ पुराण में यममार्ग क्या है?मृत्यु के बाद यमपुरी तक की कठिन यात्रा यममार्ग है।#गरुड़ पुराण#यममार्ग#प्रेत यात्रा
लोकश्राद्ध न करने से क्या होता है?श्राद्ध न करने से पितृ दोष, कलह, संतान बाधा और रोग हो सकते हैं।#श्राद्ध न करना#पितृ दोष#गरुड़ पुराण
लोकगरुड़ पुराण में श्राद्ध का फल क्या है?गरुड़ पुराण में श्राद्ध से आयु, पुत्र, यश, वैभव और बल का फल बताया गया है।#गरुड़ पुराण#श्राद्ध फल#पितृ तृप्ति
श्राद्ध दर्शनप्रेत योनि क्या है?प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
लोक84-अंश सिद्धांत क्या है?८४-अंश सिद्धान्त बताता है कि शरीर के ८४ अंशों में २८ स्वयं से और ५६ पूर्वजों से प्राप्त होते हैं।#84 अंश सिद्धांत#श्राद्ध#पितृ ऋण
लोकप्रेत बाधा के लक्षण क्या हैं?स्वप्न में घोड़ा, हाथी, बैल, विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना या जागने पर विपरीत दिशा में होना प्रेत बाधा का संकेत है।#प्रेत बाधा#लक्षण#स्वप्न
लोकप्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।#प्रेत बनने का कारण#पिण्डदान#अकाल मृत्यु
लोकप्रेत योनि क्या है?प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
लोकवैतरणी नदी क्या है?वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।#वैतरणी नदी#यमलोक#गरुड़ पुराण
लोकयममार्ग क्या है?यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।#यममार्ग#यमलोक#गरुड़ पुराण
लोकयमलोक क्या है?यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।#यमलोक#गरुड़ पुराण#कर्म न्याय
मरणोपरांत आत्मा यात्राषट्पिण्ड विधान क्या है?षट्पिण्ड विधान मृत्यु के दिन शवयात्रा के चरणों पर दिए जाने वाले छह पिण्डों का विधान है।#षट्पिण्ड विधान#छः पिण्ड#शवयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।#मृत्यु के बाद आत्मा#13 दिन की यात्रा#गरुड़ पुराण
तिल का महत्व और षट्तिलाषट्तिला क्या होता है — छह तरह के तिल प्रयोग कौन से हैं?षट्तिला = तिल के 6 प्रयोग: (1) तिल उबटन (स्नान पूर्व), (2) तिल स्नान (काले तिल जल में), (3) तिल तर्पण (पितरों को), (4) तिल हवन (अग्नि में), (5) तिल दान (ब्राह्मण-दरिद्र को), (6) तिल भक्षण (लड्डू-खिचड़ी खाना)।#षट्तिला#6 तिल प्रयोग#गरुड़ पुराण
जीवन एवं मृत्युनरक के कष्टों का उद्देश्य क्या है?नरक के कष्टों का उद्देश्य — आत्मा की शुद्धि, कर्म-न्याय की पूर्ति, पाप से सबक और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करना। 'नरक शिक्षा-स्थल है — सजा-स्थल नहीं।' धर्माचरण की प्रेरणा देना।#नरक#उद्देश्य#आत्म-शुद्धि
जीवन एवं मृत्युशाल्मली नरक में क्या होता है?शाल्मली नरक में — साँकलों से उल्टा लटकाकर पिटाई, वृक्ष के काँटे चुभना, भूख-प्यास की तीव्र पीड़ा और कोई रक्षक नहीं। परस्त्रीगामी और पति को दोष लगाने वाली स्त्री यहाँ पीड़ित होती है।#शाल्मली नरक#यातना#शाल्मली वृक्ष
जीवन एवं मृत्युशाल्मली नरक क्या है?शाल्मली नरक = 'काँटेदार शाल्मली वृक्ष वाला नरक'। 5 योजन फैला, 1 योजन ऊँचा विशाल वृक्ष। पापियों को उल्टा लटकाकर साँकलों से बाँधकर पीटा जाता है। 21 प्रमुख नरकों में वर्णित।#शाल्मली नरक#परिभाषा#शाल्मली वृक्ष
जीवन एवं मृत्युशूकरमुख नरक क्या है?शूकरमुख = 'सूअर के मुख वाला नरक'। असंख्य सूअर पापियों को नोचते हैं। 'स्त्री का अपमान करने वालों को सूअर नोचते हैं।' — गरुड़ पुराण का वचन।#शूकरमुख नरक#परिभाषा#सूअर
जीवन एवं मृत्युअसिपत्रवन नरक क्या है?असिपत्रवन = 'तलवार जैसे पत्तों वाला वन'। 2000 योजन विस्तार। पेड़ों पर पत्तों की जगह तीखी तलवारें। दावाग्नि और भयावह पक्षियों से व्याप्त। गरुड़ पुराण अध्याय 2 व 4 में वर्णित।#असिपत्रवन नरक#परिभाषा#तलवार पत्ते
जीवन एवं मृत्युकालसूत्र नरक क्या है?कालसूत्र = 'काल के धागे का नरक'। 21 प्रमुख नरकों में से एक। 'समय बर्बाद करने वालों को आग पर चलाया जाता है।' कालसूत्र से बाँधकर यातना — भागना असंभव।#कालसूत्र नरक#परिभाषा#समय
जीवन एवं मृत्युअंध तामिस्र नरक क्या है?अंधतामिस्र = 'परम अंधकार'। जौंकें रक्त चूसती हैं। माता-पिता-मित्र की हत्या करने वाले और परिवार से विश्वासघात करने वाले यहाँ जाते हैं। तामिस्र से भी अधिक भयंकर।#अंधतामिस्र नरक#परिभाषा#परम अंधकार
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक क्या है?तामिस्र = 'घना अंधकार'। 21 प्रमुख नरकों में प्रथम। अंधकारमय गुफा, लोहे की पट्टियों-मुग्दरों से पिटाई। चोरों और धोखेबाजों के लिए यह नरक है।#तामिस्र नरक#परिभाषा#अंधकार
जीवन एवं मृत्युमहा रौरव नरक में क्या होता है?महारौरव में — रौरव से अधिक विषैले रुरु सर्पों का निरंतर दंश, तीव्र अग्नि-यातना, रौरव से अधिक लंबा दंड-काल। 'निर्दोष की हत्या करने वालों के लिए' — रौरव से भी कठोर दंड।#महारौरव नरक#यातना#रुरु सर्प
जीवन एवं मृत्युमहा रौरव नरक क्या है?महारौरव = रौरव से भी अधिक भयंकर नरक। 21 प्रमुख नरकों में सम्मिलित। 'निर्दोष प्राणियों की हत्या करने वालों के लिए।' रुरु सर्पों की अधिक संख्या और तीव्र विष।#महारौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक क्या है?रौरव = 'रुरु सर्प' या 'चीत्कार' से बना नाम। 21 प्रमुख नरकों में से एक। विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के जलते तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना — यह रौरव नरक का स्वरूप है।#रौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युकुंभिपाक नरक क्या है?कुंभीपाक = 'कड़ाही में पकाने का नरक'। खौलते तेल या जलती रेत में आत्मा को पकाया जाता है। ब्रह्महत्यारे, हिंसक और संपत्ति हड़पने वाले यहाँ जाते हैं। गरुड़ पुराण के सर्वाधिक भयंकर नरकों में।#कुंभिपाक#नरक#परिभाषा
जीवन एवं मृत्युमहापापी किसे कहा जाता है?महापापी = पंच महापापों का कर्ता (ब्रह्महत्यारा, सुरापान, स्वर्ण-चोरी, गुरुपत्नीगमन, महापातकी-संसर्ग)। गरुड़ पुराण में — 'मित्रद्रोही, कृतघ्न, ब्रह्महत्यारा — ये महापापी हैं।'#महापापी#परिभाषा#पंच महापाप
जीवन एवं मृत्युमहापाप क्या है?महापाप = अत्यंत जघन्य कर्म। पंच महापाप — ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्ण-चोरी, गुरुपत्नी-गमन, महापापी-संसर्ग। गोहत्या भी महापाप। 'ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप' — गरुड़ पुराण का वचन। भूमिदान से प्रायश्चित।#महापाप#परिभाषा#पंच महापाप
जीवन एवं मृत्युपाप क्या है?पाप = धर्म के विरुद्ध, दूसरों को कष्ट देने वाला और स्वयं को अधःपतन की ओर ले जाने वाला कर्म। तीन प्रकार — मानसिक, वाचिक, कायिक। गरुड़ पुराण अध्याय 4 में पाप-कर्मों का विस्तृत वर्णन है।#पाप#परिभाषा#धर्म
जीवन एवं मृत्युनरक क्या है?नरक = पाप का फल भोगने का स्थान। पाताल लोक में। 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि है' — गरुड़ पुराण का वचन। शाश्वत नहीं — पाप-फल समाप्त होने पर पुनर्जन्म मिलता है। 84 लाख नरकों का उल्लेख है।#नरक#परिभाषा#यमलोक
जीवन एवं मृत्युप्रेत से पितृ बनने की प्रक्रिया क्या है?प्रेत से पितर बनने की प्रक्रिया — दाह-संस्कार → दशगात्र → एकादशाह → षोडश श्राद्ध → मासिक श्राद्ध → सपिंडीकरण (यहाँ प्रेत 'पितर' बनता है) → गया श्राद्ध (परम गति)। सपिंडीकरण इस यात्रा का निर्णायक पड़ाव है।#प्रेत से पितर#प्रक्रिया#सपिंडीकरण
जीवन एवं मृत्युदशगात्र में किए गए कर्मों का क्रम क्या है?दशगात्र क्रम — प्रतिदिन स्नान-संकल्प, घट-दीप-माला, पिंडदान (नाम-गोत्र सहित), चंदन-फूल, धूप-दीप-नैवेद्य-जलांजलि। ब्राह्मण को मिष्टान्न भोजन। अंत में विष्णु-प्रार्थना। दसवें दिन मुंडन।#दशगात्र#कर्म क्रम#विधि