विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अंधतामिस्र नरक के कष्टों का वर्णन तामिस्र से भी अधिक भयावह है।
जौंकें रक्त चूसती हैं — 'अंधतामिस्र — इस नरक में जौंके भरी हुई हैं जो इंसान का रक्त चूसती हैं।' ये असंख्य जौंकें पापी आत्मा का सारा रक्त चूस लेती हैं जिससे असहनीय पीड़ा होती है।
परम अंधकार — यहाँ इतना घना अंधकार है कि कुछ भी दिखाई नहीं देता। 'अंधेरे में तड़पाया जाता है।'
लोहे की छड़ों से पिटाई — तामिस्र की भाँति यहाँ भी लोहे की छड़ों से पिटाई होती है, परंतु अंधकार में होने के कारण आत्मा को पता नहीं कि प्रहार कहाँ से आ रहा है — यह और भी भयावह है।
भयावह प्राणियों का आक्रमण — 'कौवे, उल्लू, वट पक्षी, गीध, सरघे और डाँस' इस नरक में पापियों को कष्ट देते हैं।
रक्त-विहीन अवस्था — जौंकों द्वारा सारा रक्त चूस लेने के बाद आत्मा अत्यंत दुर्बल हो जाती है — परंतु मृत्यु नहीं आती, पुनः रक्त बनता है और जौंकें पुनः चूसती हैं।




