विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में बभ्रुवाहन की कथा का उद्देश्य अत्यंत स्पष्ट है।
प्राथमिक उद्देश्य — यह सिद्ध करना कि दूसरे के द्वारा दिया गया श्राद्ध और दान भी प्रेत को मुक्त कर सकता है। गरुड़ पुराण में इसी संदर्भ में भगवान विष्णु ने गरुड़ को यह 'प्राचीन इतिहास' सुनाया जो 'और्ध्वदैहिक दान के श्रेष्ठ माहात्म्य को सूचित करता है।'
द्वितीय उद्देश्य — पुत्र के श्राद्ध के महत्व को और भी प्रबल सिद्ध करना। तर्क यह है — यदि एक अनजान व्यक्ति के श्राद्ध से प्रेत मुक्त हो सकता है, तो स्वयं पुत्र के श्राद्ध से पिता की मुक्ति तो निश्चित ही है।
तृतीय उद्देश्य — प्रेत घट दान की विधि का प्रचार करना। इस कथा के माध्यम से इस विशेष दान की विधि और महत्व समझाया गया है।
चतुर्थ उद्देश्य — समाज में करुणा और परोपकार का भाव जागृत करना। एक राजा अनजान प्रेत के लिए करुणावश दान करता है — यह आदर्श समाज का चित्रण है।
फल — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'इस पुण्यप्रद इतिहास को जो सुनता है और जो सुनाता है, वे दोनों प्रेतत्व को प्राप्त नहीं होते।'





