विस्तृत उत्तर
माँ छिन्नमस्ता उग्र कोटि की देवी हैं। उनकी साधना में तीव्र तांत्रिक क्रियाओं का समावेश होता है, जो स्पष्ट रूप से वामाचार की ओर संकेत करता है।
एक संदर्भ के अनुसार, भैरवी, छिन्नमस्ता और धूमावती की पूजा वामाचारी प्रक्रिया से, घर से दूर, किसी आत्म-साक्षात्कारी तंत्र गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
छिन्नमस्ता की साधना तांत्रिक मार्ग की उस चरम स्थिति को दर्शाती है जहाँ साधक जीवन और मृत्यु, शुद्धता और अशुद्धता के द्वंद्वों से ऊपर उठकर परम सत्य का साक्षात्कार करता है। यह सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने और चेतना की गहनतम गहराइयों में उतरने का एक शक्तिशाली आह्वान है।
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