विस्तृत उत्तर
माँ धूमावती अत्यंत उग्र कोटि की देवी हैं। उनका स्वरूप, पूजा विधान (जैसे श्मशान में साधना, अपवित्र वस्तुओं का संभावित प्रयोग) और संबद्धता (अलक्ष्मी, ज्येष्ठा) वामाचार की ओर प्रबल संकेत करते हैं।
भैरवी, छिन्नमस्ता और धूमावती की पूजा को वामाचारी प्रक्रिया के अंतर्गत माना जाता है, जिसे घर से दूर और आत्म-साक्षात्कारी गुरु के निर्देशन में किया जाना चाहिए।
उन्हें 'वाममार्गी तंत्र में सिद्धियों की प्राप्ति के लिए पूजित या भयभीत' बताया गया है। यद्यपि कुछ सौम्य प्रार्थनाएँ और स्तोत्र भी उपलब्ध हैं, उनकी मूल साधना प्रकृति में तांत्रिक और प्रायः वामाचारी है।
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