विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में असिपत्रवन नरक के कारण-पापों का स्पष्ट वर्णन है।
मित्र से विश्वासघात — 'असिपत्रवन — मित्रों से दगा करने वाला इंसान इस नरक में गिराया जाता है।' मित्र-द्रोह असिपत्रवन का प्रमुख कारण है।
घर-गाँव में आग लगाना — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'जो महापापी घर, गाँव तथा जंगल में आग लगाता है, यमदूत उसे ले जाकर अग्निकुंडों में पकाते हैं। इस अग्नि में जले हुए अंगवाला वह पापी जब छाया की याचना करता है तो यमदूत उसे असिपत्र नामक वन में ले जाते हैं।' — अर्थात् आग लगाने का पाप भी असिपत्रवन की ओर ले जाता है।
विश्वासघात का व्यापक अर्थ — मित्र, साझेदार, सहयोगी — किसी से भी विश्वासघात करने पर यह नरक मिलता है।
गरुड़ पुराण का संदेश — 'प्रामाणिकता और मित्रता सनातन धर्म के मूल्य हैं। जो इन्हें तोड़ता है वह असिपत्रवन की तलवार-पत्तियों से कटता है।'



