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विस्तृत उत्तर
नागास्त्र एक आक्रामक और संहारक अस्त्र था। इसके प्रयोग से युद्धभूमि में अनगिनत विषैले सर्प प्रकट हो जाते थे, जो शत्रु सेना पर टूट पड़ते थे और उनमें हाहाकार मचा देते थे। इसका मुख्य उद्देश्य शत्रु को मारना, घायल करना या उसकी सेना को तितर-बितर करना था। यह आकाश से बरसती विष की वर्षा के समान था। इसकी शक्ति इतनी प्रचंड थी कि इसके सामने देव, दानव और मानव सभी असहाय हो जाते थे।
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