विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में दंड देने के प्रकारों का अत्यंत विस्तृत वर्णन है। यह दंड शारीरिक, मानसिक और आत्मिक — तीनों स्तरों पर होता है।
शस्त्रों से दंड — लोहे की लाठी, मुद्गर, भाला, बर्छी, गदा और मूसल से पिटाई।
अग्नि-दंड — खौलते तेल में उबालना, जलते अंगारों पर रखना, अग्नि-कुंड में जलाना।
काटने से दंड — तलवार-पत्तों के वन (असिपत्रवन) में काटा जाना, नाखूनों से खरोंचा जाना।
जीवों द्वारा दंड — कुत्तों, सर्पों, बिच्छुओं, राक्षसों और गीधों द्वारा नोचा-काटा जाना।
जलाने का दंड — तप्त लोहे पर सुलाना, गर्म सुइयों से चुभोना।
धकेलने का दंड — पर्वत से नीचे गिराना, वैतरणी में फेंकना।
मनोवैज्ञानिक दंड — नरक का भयावह दृश्य दिखाना, पापों की याद दिलाना, अकेलेपन और असहायता का बोध कराना।
गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में कहा गया है — 'एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को प्राप्त होते हैं।' यह विविधता नरक-दंड की व्यापकता को दर्शाती है।





