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नरक में जीव को क्यों चिल्लाना पड़ता है?

नरक में असहनीय शारीरिक पीड़ा, अपनों को पुकारने की व्याकुलता और पापों के पश्चाताप की पीड़ा — इन तीनों कारणों से जीव विलाप करता है।

संक्षिप्त उत्तर

नरक में असहनीय शारीरिक पीड़ा, अपनों को पुकारने की व्याकुलता और पापों के पश्चाताप की पीड़ा — इन तीनों कारणों से जीव विलाप करता है। यमदूत उस पर कोई दया नहीं करते।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में नरक में जीव के चिल्लाने और विलाप का बहुत स्पष्ट वर्णन है। वैतरणी नदी के वर्णन में कहा गया है — 'इसके प्रवाह में गिरे पापी हे भाई, हे पुत्र, हे तात — कहते हुए विलाप करते हैं।'

जीव को चिल्लाना क्यों पड़ता है — पहला, असहनीय शारीरिक पीड़ा — लोहे की लाठियों से पिटाई, गर्म तेल में उबाला जाना, कुत्तों का काटना — यह सब इतनी तीव्र पीड़ा देती है कि जीव चिल्लाए बिना नहीं रह सकता। दूसरा, अपनों को पुकारना — परंतु परिजन वहाँ नहीं हैं। वह चिल्लाता है पर कोई नहीं आता। यह अकेलापन और असहायता उसे और अधिक व्याकुल करती है। तीसरा, पापों का पश्चाताप — जीव जानता है कि यह उसी के कर्मों का फल है। यह पश्चाताप की पीड़ा उसे भीतर से तोड़ती है।

गरुड़ पुराण में यमदूतों को यह भी बताया गया है कि यमदूत उन पापियों के विलाप पर कोई दया नहीं दिखाते — 'यमदूत उस पर बिल्कुल भी दया नहीं करते।'

यह चिल्लाना उस व्यक्ति की दशा का चित्रण है जिसने जीवन में दूसरों के चिल्लाने पर ध्यान नहीं दिया।

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