विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में श्राद्ध का विस्तृत वर्णन करने के पीछे अनेक शास्त्रीय कारण हैं।
प्रेत-मुक्ति की प्रक्रिया — प्रेतकल्प का मूल विषय प्रेत-मुक्ति है और श्राद्ध वह प्रक्रिया है जिससे प्रेत पितर बनता है। 'जब शास्त्रोक्त विधि से सपिण्डन विधान किया जाता है, तब वह प्रेत-शरीर से मुक्त हो जाता है।'
पितृ-ऋण का निर्वहन — सनातन धर्म में पितृ-ऋण एक अनिवार्य ऋण है। श्राद्ध इसे चुकाने का साधन है। प्रेतकल्प में श्राद्ध का वर्णन इस कर्तव्य को स्पष्ट करने के लिए है।
परिजनों को कर्म-निर्देश — परिजनों को स्पष्ट निर्देश देना कि मृत्यु के बाद कब, कैसे, किस विधि से श्राद्ध करना है — यही प्रेतकल्प का व्यावहारिक उद्देश्य है।
कर्म का फल — 'श्राद्ध से तृप्त होकर सभी पितर पुत्र को वांछित फल देते हैं।' यह पारस्परिक लाभ का संबंध है जिसे प्रेतकल्प स्थापित करता है।
समाज का कल्याण — श्राद्ध की परंपरा पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और पारिवारिक बंधनों को जीवित रखती है।





