विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग के विषय में एक महत्वपूर्ण सत्य बताया गया है — यह मार्ग पुण्यात्माओं के लिए सुखद होता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है — 'यो मार्गः पुण्यात्माओं के लिए सुखद है।'
पुण्यात्माओं के लिए मृत्यु के समय यमदूत नहीं, बल्कि देवदूत आते हैं। ये देवदूत दिव्य विमान लेकर आते हैं और पुण्यात्मा का सम्मानपूर्वक स्वागत करते हैं। उन्हें किसी पाश में नहीं बाँधा जाता — वे स्वेच्छा से, हर्षित होकर अपनी अंतिम यात्रा पर निकलती हैं।
यमलोक पहुँचने पर पुण्यात्माओं को उत्तर, पश्चिम या पूर्व द्वार से प्रवेश मिलता है। जो सत्यनिष्ठ, सेवाभावी और पितृभक्त हों, उन्हें उत्तर द्वार से सम्मान के साथ प्रवेश मिलता है। जो दान-पुण्य और धर्म के पथ पर चले, उनके लिए पश्चिम द्वार होता है। जो योगी, ऋषि और सिद्ध हों, वे पूर्व द्वार से प्रवेश करते हैं जहाँ देव और गंधर्व उनका स्वागत करते हैं।
वैतरणी नदी जो पापियों के लिए भयावह है, वह पुण्यात्माओं के लिए सरलता से पार हो जाती है — विशेषतः जिन्होंने जीवन में गौदान किया हो, वे उसी गाय की पूँछ पकड़कर आसानी से पार हो जाते हैं।





