विस्तृत उत्तर
रुद्राक्ष को 'शिव के अश्रु' कहते हैं। शिव पुराण में इसकी महिमा विस्तार से वर्णित है। रुद्राक्ष का जल पीना अत्यंत पवित्र और लाभकारी माना जाता है।
शास्त्रीय महत्व: रुद्राक्ष को भिगोया जाने वाला जल 'रुद्राक्षोदक' कहलाता है। शिव पुराण में कहा गया है कि रुद्राक्ष के दर्शन से पाप नष्ट होते हैं और उसके जल के पान से अत्यधिक पुण्य मिलता है।
आध्यात्मिक लाभ: रुद्राक्ष का जल शरीर और मन की शुद्धि करता है। यह मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है। तनाव दूर करने में अत्यंत प्रभावशाली है। नित्य रुद्राक्ष-जल पीने से तेज और सौंदर्य में वृद्धि होती है।
वैज्ञानिक आधार: रुद्राक्ष के दाने में एक विशेष विद्युतचुंबकीय गुण होता है। रुद्राक्ष-जल में इसके कार्बनिक यौगिक घुल जाते हैं। शोधों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने और उसका जल पीने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय की क्रिया नियमित होती है।
उपयोग विधि: रात को एक पंच-मुखी रुद्राक्ष को तांबे के कप में जल में डुबोएँ। प्रातःकाल उठकर 'ॐ नमः शिवाय' कहते हुए वह जल पिएँ। यह नित्य क्रिया स्वास्थ्य और शांति दोनों देती है।





