विस्तृत उत्तर
हवन की भस्म (विभूति) को शिव का प्रसाद माना जाता है। इसे माथे पर लगाना एक अत्यंत पवित्र परंपरा है।
शास्त्रीय महत्व: शिव पुराण के अनुसार शिव स्वयं भस्म धारण करते हैं। हवन की अग्नि 'शिव की अग्नि' है और उससे प्राप्त भस्म विभूति कहलाती है। भस्म की तीन क्षैतिज रेखाएँ (त्रिपुंड) माथे पर लगाना ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र के सार का प्रतिनिधित्व करती हैं। इससे आत्मशुद्धि होती है और शिव-पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक लाभ: हवन-भस्म माथे पर लगाने से भय दूर होता है। इससे नज़रदोष, भूत-बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। India TV के अनुसार — प्रतिदिन हवन-भस्म का तिलक माथे पर लगाने से अदृश्य शक्ति का भय और डरावने सपने समाप्त होते हैं।
वैज्ञानिक पक्ष: हवन की भस्म में जो जड़ी-बूटियाँ उपयोग की जाती हैं उनके सक्रिय यौगिक भस्म में भी रहते हैं। माथे के 'आज्ञा चक्र' क्षेत्र पर इसके लेपन से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है।
धारण विधि: हवन की भस्म को तर्जनी और मध्यमा उँगली से माथे पर तीन क्षैतिज रेखाओं में लगाएँ। स्त्री-पुरुष दोनों लगा सकते हैं।





