विस्तृत उत्तर
वरुणास्त्र और आग्नेयास्त्र प्रकृति के दो मूल विरोधी तत्वों — अग्नि और जल — का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मूल संबंध — आग्नेयास्त्र = अग्निदेव का अस्त्र (अग्नि तत्व); वरुणास्त्र = वरुणदेव का अस्त्र (जल तत्व)। जल और अग्नि परस्पर विरोधी तत्व हैं — जल अग्नि को बुझाता है। इसी नियम से युद्ध में वरुणास्त्र आग्नेयास्त्र का प्रतिकार करता था।
प्रतिकार का व्यवहार — जब कोई योद्धा आग्नेयास्त्र चलाता और दूसरी ओर का कुशल योद्धा वरुणास्त्र का आह्वान करता, तो जल की भीषण वर्षा से आग्नेयास्त्र की अग्नि शांत हो जाती थी।
महाभारत के उदाहरण — महाभारत में द्रोणाचार्य ने सात्यकि पर आग्नेयास्त्र चलाया तो सात्यकि ने वरुणास्त्र से उसका सामना किया। इसी प्रकार भीष्म और परशुराम के युद्ध में भी इनका प्रयोग हुआ।
व्यापक दर्शन — पुराणिक अस्त्र-विद्या में प्रत्येक तत्व-अस्त्र का प्रतिकार उसके विपरीत तत्व से होता था — आग्नेय का वरुण से, वायव्य का पर्वत से इत्यादि। यह प्राकृतिक संतुलन का दिव्य स्वरूप था।





