विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग की कठिनाई का वर्णन करते हुए स्पष्ट बताया गया है कि यह मार्ग उन जीवात्माओं के लिए अत्यंत कठिन होता है जिन्होंने जीवन में पापकर्म किए हों, धर्म का पालन न किया हो, दान-पुण्य से दूर रहे हों और जिनका जीवन स्वार्थ, हिंसा, असत्य और अहंकार से भरा रहा हो।
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में इन पापी आत्माओं की यममार्ग की दशा का वर्णन है — वे भूख-प्यास से व्याकुल होती हैं। गर्म बालू पर चलने में असमर्थ होती हैं। जगह-जगह गिरती हैं और बेहोश होती हैं। यमदूत उनकी पीठ पर कोड़े मारते हुए आगे ले जाते हैं। रास्ते में कुत्ते काटते हैं। तेज धूप, दावाग्नि और झुलसाने वाली हवाएँ उन्हें तपाती हैं।
इसके विपरीत जिन्होंने जीवन में दान-पुण्य किया हो, गौदान किया हो, परिवार के सदस्यों ने उचित पिंडदान और श्राद्ध किया हो — उन जीवात्माओं को यममार्ग में कम कष्ट होता है। शास्त्रों में इसीलिए जीवन में दान का और मृत्यु के बाद पिंडदान का इतना महत्व बताया गया है।





