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पूजा विधि प्रश्नोत्तरी — 211 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूजा विधि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 211 प्रश्न

पूजा विधि

दुर्गाष्टमी की पूजा में कलश और अखंड ज्योति कैसे स्थापित करें?

ईशान कोण में जल भरे कलश में सुपारी, सिक्का और आम के 5 पत्ते डालकर उस पर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। कलश के दाहिनी ओर गाय के घी का या बाईं ओर तिल के तेल का अखंड दीपक जलाएं।

कलश स्थापनाअखंड ज्योतिरुद्रयामल तंत्र
पूजा विधि

मासिक दुर्गाष्टमी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह तिल के जल से स्नान कर लाल कपड़े पहनें। "श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं मासिक दुर्गाष्टमी व्रतं अहं करिष्ये" बोलकर संकल्प लें। माता की मूर्ति स्थापित कर गणेश पूजन के बाद माता को पंचामृत से स्नान कराएं और सुहाग सामग्री चढ़ाएं।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रषोडश मातृका
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में केले के खंभे और कलश क्यों लगाए जाते हैं?

केले का पेड़ पवित्रता, हरियाली और घर में वृद्धि (उर्वरता) का प्रतीक होता है। वहीं, आम के पत्तों और नारियल वाला कलश पूरे ब्रह्मांड और वरुण देवता (जल) का प्रतीक माना जाता है।

केले के खंभेकलश स्थापनामंडप
पूजा विधि

सत्यनारायण भगवान का प्रसाद (सपाद भक्ष्य) कैसे बनता है?

प्रसाद सवा के अनुपात (1.25 किलो या सवा पाव) में बनता है। इसे बनाने के लिए 5 चीजें लगती हैं: आटा (या सूजी), गाय का दूध, गाय का घी, चीनी (या गुड़) और केला।

सपाद भक्ष्यप्रसादशिन्नी
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा का संकल्प कैसे लें? (मंत्र सहित)

हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान का ध्यान करें और मंत्र बोलें: "मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।" फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।

संकल्प मंत्रपूजा विधिकाम्य कर्म
पूजा विधि

शनिवार व्रत की पूजा विधि और संकल्प मंत्र क्या है?

शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पर शनि देव (सुपारी/यंत्र) स्थापित करें। संकल्प लें, सरसों का तेल चढ़ाएं, अपराजिता/शमी के फूल चढ़ाकर उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रतैलभ्यंग
पूजा विधि

काली माता को कौन सा फूल चढ़ाएं?

काली माता को लाल 'गुड़हल' का फूल सबसे ज्यादा पसंद है। चूंकि शनिवार का दिन है, इसलिए शनि शांति के लिए नीले रंग का 'अपराजिता' फूल भी चढ़ाना बहुत शुभ होता है।

पुष्पगुड़हलअपराजिता
पूजा विधि

शनिवार काली पूजा की विधि क्या है?

काले कपड़े पहनें, शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं। घर आकर माता के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं (जिसमें काले तिल और लौंग हों), लाल फूल चढ़ाएं और चालीसा पढ़ें।

पूजा विधिदीपकसरसों का तेल
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प्रदोष काल (शाम) की विस्तृत 'षोडशोपचार पूजा' कैसे की जाती है?

षोडशोपचार पूजाशिवलिंग स्थापनाबिल्व पत्र
पूजा विधि

प्रदोष व्रत के प्रातःकालीन नियम और 'संकल्प' का श्लोक क्या है?

संकल्प मंत्रप्रातःकालीन नियमब्रह्म मुहूर्त
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संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चाँद निकलने पर एक लोटे में पानी, कच्चा दूध, चावल, लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर चंद्रमा को देखते हुए मंत्रों के साथ अर्घ्य देना चाहिए।

चंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्रचंद्र पूजा
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संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें?

शाम को गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। फिर लाल चंदन, लाल फूल, 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और आरती करें।

पूजा विधिकलश स्थापना21 दूर्वा
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शिव पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना कैसे करें?

पूजा के बाद हाथ जोड़कर शिव जी से प्रार्थना करें कि अज्ञानवश पूजा में जो भी कमी रह गई हो, उसे अपनी कृपा से क्षमा कर सफल बनाएं।

क्षमा प्रार्थनापूजा मंत्रशिव पुराण
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मासिक शिवरात्रि की पूजा में क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?

पूजा में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बिल्व पत्र और भस्म मुख्य रूप से चढ़ानी चाहिए।

पूजा सामग्रीबिल्व पत्रअभिषेक द्रव्य
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पार्थिव शिवलिंग की पूजा कैसे करते हैं?

शुद्ध मिट्टी, गोबर और भस्म से अंगूठे के आकार का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करना 'पार्थिव पूजन' कहलाता है। यह कलयुग में सबसे श्रेष्ठ पूजा है।

पार्थिव शिवलिंगमिट्टी का शिवलिंगशिव पुराण
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शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा कैसे करते हैं?

रात के चार हिस्सों में अलग-अलग चीजों (दूध, दही, घी, शहद) से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। हर प्रहर की पूजा का अपना विशेष फल है।

चार प्रहरअभिषेकपूजा नियम
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पूर्णिमा के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, पानी, सफेद फूल, चंदन और चावल मिलाकर चंद्रमा को चढ़ाएं। इसके बाद ही प्रसाद खाकर व्रत खोलें।

चंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्रपारण
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पूर्णिमा व्रत की पूजा कैसे करें?

सुबह तिल और आंवले के जल से नहाकर संकल्प लें। शाम को कलश स्थापित कर भगवान सत्यनारायण की 16 तरीकों से पूजा करें, कथा पढ़ें और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

सत्यनारायण पूजासंकल्पषोडशोपचार
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अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कैसे करें?

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे या चाँदी के लोटे में जल और काले तिल लेकर, अंगूठे और पहली उंगली के बीच (पितृ तीर्थ) से जल गिराते हुए पितरों को याद करें।

पितृ तर्पणकुश की अंगूठीतर्पण विधि
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शनिवार को छाया दान कैसे करते हैं?

एक लोहे या कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखकर एक सिक्का डालें और उसे मंदिर में दान कर दें। इसे छाया दान कहते हैं।

छाया दानरोग मुक्तितेल का दान
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शनिवार व्रत की पूजा कैसे करें?

पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पहनकर पूजा करें। शनि देव को सरसों का तेल, नीले फूल, काले तिल और उड़द की दाल का भोग लगाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

पूजा विधिसरसों का तेललोहे की कील
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वैभव लक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा क्यों करते हैं?

श्रीयंत्र माता लक्ष्मी की शक्ति का साक्षात प्रतीक है। नियम के अनुसार श्रीयंत्र की पूजा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

श्रीयंत्रअष्टलक्ष्मीतांत्रिक ऊर्जा
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वैभव लक्ष्मी व्रत में क्या प्रसाद चढ़ता है?

इस व्रत में माता को चावल की खीर या शक्कर-दूध का भोग लगाया जाता है। सफेद और मीठा प्रसाद शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी (क्षीरसागर से उत्पन्न) को अति प्रिय है।

खीर का प्रसादसफेद भोजनशुक्र ग्रह
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वैभव लक्ष्मी व्रत की पूजा कैसे करें?

लाल कपड़ा बिछाकर चावल की ढेरी पर कलश रखें। कलश के ऊपर कटोरी में सिक्का और पीछे श्रीयंत्र रखें। कुमकुम, चंदन लगाकर लाल फूल चढ़ाएं और कथा पढ़ें।

पूजा विधिकलश स्थापनालाल कपड़ा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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