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विस्तृत उत्तर
ब्रह्म मुहूर्त में जल में काले तिल और आंवले का रस डालकर स्नान करें। हाथ में जल, अक्षत और सिक्का लेकर व्रत का संकल्प लें। शाम के समय एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु/सत्यनारायण की कलश स्थापना के साथ 'षोडशोपचार' (16 प्रकार से) पूजा करें। स्कन्द पुराण की सत्यनारायण कथा पढ़ें और चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें।
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