विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के अनुसार पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए ताकि अनजाने में हुई गलतियां माफ हो सकें। इसका मंत्र है: "अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानाज्जपूजादिकं मया। कृतं तदस्तु कृपया सफलं तव शङ्कर॥" इसका अर्थ है कि अज्ञान या ज्ञान में जो भी पूजा हुई है, हे शंकर उसे अपनी कृपा से सफल करें।




