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लोक प्रश्नोत्तरी — 3617 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित लोक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3617 प्रश्न

लोक

अलकनंदा को भागीरथी क्यों कहते हैं?

अलकनंदा को भागीरथी इसलिए कहते हैं क्योंकि महाराज भगीरथ की घोर तपस्या से यह पृथ्वी पर अवतरित हुई और भगीरथ के रथ का अनुसरण करती हुई भारतवर्ष में आई।

अलकनंदाभागीरथीभगीरथ
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गंगा की चार धाराओं के नाम और दिशाएँ क्या हैं?

गंगा की चार धाराएँ — सीता (पूर्व, भद्राश्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण, भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम, केतुमाल), सोमा/भद्रा (उत्तर, उत्तरकुरु)।

गंगाचार धाराएँसीता पूर्व
लोक

उत्तरकुरु वर्ष को भोगभूमि क्यों कहते हैं?

उत्तरकुरु वर्ष निरंतर सुख और आनंद का क्षेत्र है जहाँ पूर्वजन्म के पुण्यों का भोग होता है। यहाँ भूदेवी भगवान वराह की पूजा करती हैं।

उत्तरकुरु वर्षभोगभूमिसुख
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किम्पुरुष वर्ष में हनुमान जी क्या करते हैं?

किम्पुरुष वर्ष (हिमालय और हेमकूट के बीच) में हनुमान जी अन्य किम्पुरुषों के साथ भगवान श्रीराम की निरंतर आराधना और कीर्तन करते हैं।

किम्पुरुष वर्षहनुमानश्रीराम
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भारतवर्ष और अन्य वर्षों में क्या मूलभूत अंतर है?

भारतवर्ष एकमात्र कर्मभूमि है जहाँ चारों युग होते हैं और मोक्ष संभव है। अन्य वर्ष केवल भोगभूमि हैं जहाँ पुण्यों का भोग होता है।

भारतवर्षभोगभूमिकर्मभूमि
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इलावृत वर्ष में पुरुष स्त्री क्यों बन जाते हैं?

देवी भवानी के एक प्राचीन शाप के कारण इलावृत वर्ष में प्रवेश करने वाला कोई भी पुरुष तुरंत स्त्री बन जाता है। केवल भगवान शिव ही यहाँ पुरुष हैं।

इलावृत वर्षपुरुष स्त्रीभगवान शिव
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जम्बूद्वीप के नव-वर्ष कौन-कौन से हैं?

जम्बूद्वीप के नौ वर्ष हैं — इलावृत, भद्राश्व, हरि, केतुमाल, रम्यक, हिरण्मय, उत्तरकुरु, किम्पुरुष और भारतवर्ष।

जम्बूद्वीपनव वर्षभारतवर्ष
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जाम्बूनद सोना क्या होता है?

जाम्बूनद दिव्य सोना है जो जम्बू वृक्ष के रस के मिट्टी, वायु और सूर्य के ताप से पकने पर बनता है। देवगण इसी से अपने आभूषण बनाते हैं।

जाम्बूनदसोनाजम्बू नदी
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जम्बू नदी क्या है और कैसे बनती है?

जम्बूद्वीप के दिव्य जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फल गिरकर फटते हैं। उनके रस से जम्बू नदी बनती है जिसे पीने वाले को रोग, बुढ़ापा और शोक नहीं होता।

जम्बू नदीजम्बू वृक्षफल
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प्रियव्रत के रथ के पहियों से सात समुद्र कैसे बने?

प्रियव्रत के रथ की सात परिक्रमाओं से पृथ्वी पर सात वलयाकार खाइयाँ बनीं जो सात महासागर बन गईं और उनके बीच के भू-भाग सप्तद्वीप बन गए।

प्रियव्रतरथ पहिएसात समुद्र
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महाराज प्रियव्रत ने रात्रि का अंधकार मिटाने के लिए क्या किया?

महाराज प्रियव्रत ने सूर्य के रथ का पीछा करते हुए अपने तेजोमय रथ पर सवार होकर पृथ्वी की सात बार परिक्रमा की ताकि रात्रि का अंधकार मिट सके।

प्रियव्रतरात्रिसूर्य
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सुमेरु पर्वत के शिखर पर क्या है?

सुमेरु पर्वत के शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' (शातकौम्भी) है जो 10,000 योजन विस्तृत है। इसे आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हुए हैं।

सुमेरु पर्वतब्रह्मपुरीब्रह्मा
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सुमेरु पर्वत की ऊँचाई और आकार कैसा है?

सुमेरु पर्वत 84,000 योजन ऊँचा और 16,000 योजन गहरा है। शिखर का व्यास 32,000 योजन है जबकि आधार केवल 16,000 योजन — यह उल्टे शंकु जैसा है।

सुमेरु पर्वतऊँचाईआकार
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सुमेरु पर्वत कहाँ है और इसका महत्व क्या है?

सुमेरु पर्वत जम्बूद्वीप के केंद्र में इलावृत वर्ष के मध्य में है। यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड की धुरी है और इसके शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' है।

सुमेरु पर्वतजम्बूद्वीपइलावृत वर्ष
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महाराज प्रियव्रत ने सात द्वीपों का शासन किसे सौंपा?

प्रियव्रत के सात पुत्रों को सात द्वीप मिले — आग्नीध्र (जम्बू), इध्मजिह्व (प्लक्ष), यज्ञबाहु (शाल्मलि), हिरण्यरेता (कुश), घृतपृष्ठ (क्रौंच), मेधातिथि (शाक), वीतिहोत्र (पुष्कर)।

प्रियव्रतसात पुत्रशासन
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सात महासागरों में किस-किस द्रव का वर्णन है?

सात महासागर — लवण (खारा जल), इक्षु (गन्ने का रस), सुरा (मदिरा), सर्पि (घी), दधि (दही), दुग्ध (दूध) और जल (मीठा जल) — से भरे हैं।

सात महासागरद्रवघी
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प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती द्वीप से कितना बड़ा है?

प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती से ठीक दोगुना बड़ा है। जम्बू द्वीप 1 लाख योजन से शुरू होकर पुष्कर द्वीप 64 लाख योजन तक है।

सप्तद्वीपदोगुनाविस्तार
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भूमण्डल की संरचना कमल-पत्र के समान क्यों बताई गई है?

जम्बूद्वीप उत्तर-दक्षिण में दबा और मध्य में उभरा होने से कमल-पत्र जैसा दिखता है। सुमेरु पर्वत कमल की कर्णिका और नव-वर्ष उसकी पंखुड़ियाँ हैं।

भूमण्डलकमल पत्रआकार
लोक

लोकालोक पर्वत क्या है?

लोकालोक पर्वत भूमण्डल की सबसे बाहरी सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यह 10,000 योजन ऊँचा है और यहाँ स्वयं भगवान विष्णु निवास करते हैं।

लोकालोक पर्वतप्रकाश अंधकारभूलोक सीमा
लोक

भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?

मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।

भूलोकमृत्युपरलोक
लोक

जम्बूद्वीप का नाम जम्बू क्यों पड़ा?

जम्बूद्वीप का नाम एक विशाल दिव्य जम्बू (जामुन) वृक्ष के कारण पड़ा। इसके फलों के रस से जम्बू नदी बनती है और उस रस से जाम्बूनद (दिव्य सोना) उत्पन्न होता है।

जम्बूद्वीपजम्बू वृक्षजाम्बूनद
लोक

भूलोक पर गंगा की कितनी धाराएँ हैं?

गंगा मेरु पर्वत से चार धाराओं में बँटती हैं — सीता (पूर्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण), चक्षु (पश्चिम) और सोमा/भद्रा (उत्तर)।

गंगाचार धाराएँसीता
लोक

गंगा नदी का भूलोक पर अवतरण कैसे हुआ?

भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। चरण-स्पर्श से वह 'विष्णुपदी गंगा' बनी।

गंगाअवतरणवामन अवतार
लोक

महाराज प्रियव्रत कौन थे?

महाराज प्रियव्रत स्वायम्भुव मनु के पुत्र थे जिन्होंने 11 करोड़ वर्षों तक शासन किया। उनके रथ के पहियों से सप्तद्वीप बने और उन्होंने सात पुत्रों को सात द्वीपों का राजा बनाया।

महाराज प्रियव्रतस्वायम्भुव मनुभूमण्डल

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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