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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कथा सुनने का फल क्या है?

गोकर्ण कथा का एक अक्षर भी कानों से ग्रहण करने वालों को फिर गर्भ में नहीं आना पड़ा, ऐसा फल बताया गया है।

गोकर्ण कथाश्रवण फलपाप नाश
श्रीमद्भागवत

श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

श्राद्धभागवत कथापितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने से पाप कैसे जलते हैं?

भागवत सप्ताह को अग्नि के समान कहा गया है, जो मन-वचन-कर्म से हुए नए-पुराने सभी पापों को जला देता है।

कथा श्रवणपापअग्नि
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?

दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।

सर्वमुक्तिभागवत कथागोकर्ण
श्रीमद्भागवत

श्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?

श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।

श्रावण मासभागवत कथासप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

भगवान कृष्णभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत श्रवण से गोलोक कैसे मिलता है?

श्रावण मास में पुनः भागवत सप्ताह के बाद भगवान कृष्ण प्रकट हुए और गोकर्ण सहित श्रोताओं को गोलोक-हरिलोक ले गए।

गोलोकभागवत श्रवणगोकर्ण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?

धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।

वैकुंठभागवत कथाश्रवण फल
श्रीमद्भागवत

शरीर नश्वर है तो क्या करना चाहिए?

शरीर नश्वर है, इसलिए उससे अविनाशी फल कमाने के लिये भागवत कथा सुननी और हृदय में उतारनी चाहिए।

शरीर नश्वरभागवत श्रवणमुक्ति
श्रीमद्भागवत

जीवन का स्थायी फल कैसे मिले?

नश्वर शरीर से स्थायी फल पाने का मार्ग भागवत कथा श्रवण, पाप-क्षय, संशय-नाश और मुक्ति से जोड़ा गया है।

जीवनस्थायी फलभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

शरीर को नश्वर क्यों कहा गया है?

शरीर को हड्डी, नस, मांस, रक्त, चर्म और मल-मूत्र का पात्र कहकर क्षणभंगुर और रोग-दुख से भरा बताया गया है।

शरीरनश्वरतावैराग्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?

भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।

कथा तीर्थभागवत कथामुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से कर्म कैसे नष्ट होते हैं?

सप्ताह श्रवण को पाप जलाने वाली अग्नि और कर्म क्षीण करने वाला साधन कहा गया है।

कर्मपाप नाशभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?

सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

संशयभागवत कथाहृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?

कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

हृदय ग्रंथिभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा में एकाग्रता क्यों जरूरी है?

एकाग्रता इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रमाद से श्रवण और चंचल चित्त से जप निष्फल हो जाता है।

एकाग्रताकथा श्रवणमनन
श्रीमद्भागवत

गुरु वचन पर विश्वास क्यों जरूरी है?

कथा का यथार्थ फल पाने के नियमों में गुरु वचन पर विश्वास को स्पष्ट रूप से रखा गया है।

गुरु वचनविश्वासश्रवण फल
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।

श्रद्धाभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने वालों को अलग-अलग फल क्यों मिलता है?

फल का भेद श्रवण के भेद से हुआ; सबने सुना, पर धुंधुकारी ने निराहार रहकर स्थिर मन से मनन भी किया।

कथा फलफलभेदश्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने का पूरा फल कैसे मिलता है?

पूरा फल गुरु वचन में विश्वास, दीनता, मन-दोषों पर विजय, कथा में एकाग्रता और श्रवण के बाद मनन से मिलता है।

कथा फलश्रवणमनन
श्रीमद्भागवत

केवल कथा सुनना काफी है या मनन भी जरूरी है?

कथा में साफ कहा गया है कि केवल श्रवण समान था, पर मनन अलग था; इसलिए फल में भेद हुआ।

कथा श्रवणमननश्रवण फल
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय मन कैसा होना चाहिए?

कथा सुनते समय मन श्रद्धायुक्त, एकाग्र, दीनभाव वाला और गुरु वचन में विश्वास रखने वाला होना चाहिए।

कथा श्रवणमनएकाग्रता
श्रीमद्भागवत

सात दिन भागवत सुनने का फल क्या है?

सात दिन भागवत सुनने से धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ, और पुनः श्रवण से श्रोताओं को हरिधाम तथा गोलोक की प्राप्ति हुई।

सात दिन भागवतभागवत सप्ताहमुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से मुक्ति कैसे मिलती है?

भागवत श्रवण से मुक्ति तब फलित होती है जब श्रद्धा, मनन, एकाग्रता और गुरु वचन में विश्वास जुड़ता है।

भागवत श्रवणमुक्तिमनन

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