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श्रीलिङ्गमहापुराण प्रश्नोत्तरी — 578 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीलिङ्गमहापुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 578 प्रश्न

शौच और नियम

अन्तःशौच कैसे होता है?

वैराग्यरूपी मृत्तिका का लेपन और आत्मज्ञानरूपी जल में स्नान अन्तःशौच कहा गया है।

अन्तःशौचवैराग्यआत्मज्ञान
शौच और नियम

बाहरी शुद्धि से ज्यादा आंतरिक शुद्धि क्यों जरूरी है?

आंतरिक शुद्धि इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि अंतःशौच के बिना बाहरी स्नान और तीर्थजल भी साधक को वास्तविक शुद्ध नहीं करते।

आंतरिक शुद्धिबाहरी शुद्धिअन्तःशौच
शौच और नियम

योग में शुद्धि का सही अर्थ क्या है?

योग में शुद्धि बाह्य और आंतरिक दोनों है, पर आंतरिक शुचिता श्रेष्ठ बताई गई है।

शुद्धिशौचआंतरिक शुचिता
वैराग्य

अमृतत्व पाने का मार्ग क्या बताया गया है?

अमृतत्व त्याग से प्राप्त बताया गया है; कर्म, संतान या द्रव्य से नहीं।

अमृतत्वत्यागवैराग्य
वैराग्य

कामनाएं भोग से क्यों बढ़ती हैं?

कामना भोग से शांत नहीं होती; वह अग्नि में आहुति डालने की तरह और बढ़ती है।

कामनाभोगअग्नि उपमा
वैराग्य

विषय भोगों से मन क्यों नहीं भरता?

विषयों के भोग से इन्द्रियों की तृप्ति नहीं होती और कामना अग्नि की तरह बढ़ती जाती है।

विषय भोगइन्द्रिय तृप्तिवैराग्य
यम

गृहस्थ व्यक्ति ब्रह्मचर्य कैसे रख सकता है?

गृहस्थ के लिये परनारी से मन, वाणी और कर्म से भोग-प्रवृत्ति न रखना और अपनी पत्नी से उचित समय पर ही संसर्ग करना ब्रह्मचर्य है।

गृहस्थ ब्रह्मचर्यस्वदारऋतुकाल
यम

ब्रह्मचर्य का अर्थ क्या है?

यतियों, ब्रह्मचारियों और पत्नीरहित संन्यासियों के लिये मन, वचन और कर्म से मैथुन में प्रवृत्ति न रखना ब्रह्मचर्य है।

ब्रह्मचर्ययतिब्रह्मचारी
यम

चोरी न करना योग में क्यों जरूरी है?

विपत्ति में भी मन, वचन और कर्म से दूसरों का द्रव्य न लेना अस्तेय है।

अस्तेयचोरी न करनामन वचन कर्म
यम

सत्य बोलने का सही तरीका क्या बताया गया है?

जो देखा, सुना, अनुमान या अनुभव किया हो, उसे दूसरों को कष्ट दिए बिना यथार्थ कहना सत्य है।

सत्यवाणीदूसरों को कष्ट न देना
यम

अहिंसा का असली अर्थ क्या बताया गया है?

सभी प्राणियों में आत्मवत् दृष्टि रखकर उनके हित में प्रवृत्त रहना अहिंसा कहा गया है।

अहिंसाआत्मवत दृष्टिप्राणी हित
यम

योग में यम का मतलब क्या है?

तप में प्रवृत्ति और विषय-भोगों से निवृत्ति को यम कहा गया है। अहिंसा इसका पहला हेतु है।

यमतपविषय निवृत्ति
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

अष्टांग योगयमनियम
योग का स्वरूप

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है?

चित्त की एकाग्रता, रुद्र का ज्ञान और निर्वाण शिव की कृपा से बताए गए हैं।

शिव कृपायोगमुक्ति
योग का स्वरूप

योग का सही अर्थ क्या बताया गया है?

जीव को परमार्थ तत्त्व का ज्ञान प्राप्त होना योग कहा गया है; चित्तवृत्तियों पर नियंत्रण भी योग बताया गया है।

योगपरमार्थ तत्त्वचित्त एकाग्रता
योगस्थान

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है?

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।

हृदयनाभिभ्रूमध्य
योगस्थान

योग में शरीर के कौन से स्थान बताए गए हैं?

योग के लिये हृत्कमल, मूलाधार और भृकुटियों के मध्य स्थित आवर्त यानी आज्ञाचक्र मुख्य स्थान बताए गए हैं।

योगस्थानहृत्कमलमूलाधार
पाशुपत योग

पाशुपत योग से परम ऐश्वर्य कैसे मिलता है?

पाशुपत योग सबको परम ऐश्वर्य दिलाने हेतु पशुपति रुद्र द्वारा प्रवर्तित बताया गया है।

पाशुपत योगपरम ऐश्वर्यपशुपति रुद्र
पाशुपत योग

पाशुपत योग किसने प्रवर्तित किया?

पाशुपत योग पशुपति रुद्र ने प्रवर्तित किया।

पाशुपत योगपशुपति रुद्रशिव
पाशुपत योग

पाशुपत योग क्या है?

पाशुपत योग वह योग है जिसे पशुपति रुद्र ने सबको परम ऐश्वर्य दिलाने के लिए प्रवर्तित किया।

पाशुपत योगपशुपति रुद्रपरम ऐश्वर्य
पाशुपत योग

शिव को पशुपति क्यों कहा जाता है?

देवता से पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं; उनके पति यानी स्वामी होने के कारण शिव पशुपति हैं।

पशुपतिशिवपशु
पाशुपत योग

पशु किसे कहा गया है?

देवता से लेकर पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं।

पशुदेवतापिशाच
पाशुपत योग

पाशुपत योग प्राप्त करने से क्या फल मिला?

पाशुपत योग प्राप्त करने से शिष्य और प्रशिष्य शिवलोक के अधिकारी हुए।

पाशुपत योगशिवलोकशिष्य
पाशुपत योग

योगाचार्यों के शिष्य और प्रशिष्य कहाँ पहुँचे?

योगाचार्यों के सैकड़ों-हजारों शिष्य और प्रशिष्य पाशुपत योग प्राप्त कर शिवलोक के अधिकारी हुए।

शिष्यप्रशिष्यपाशुपत योग

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।