ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

योग प्रश्नोत्तरी — 64 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित योग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 64 प्रश्न

माहेश्वर योग

माहेश्वर योग क्या है?

माहेश्वर योग शिवकृपा से प्राप्त होने वाला ज्ञानस्वरूप दिव्य योग है, जिसमें ज्ञान से योग और योग से मुक्ति बताई गई है।

माहेश्वर योगशिव कृपाज्ञान
श्रीमद्भागवत

योग तपस्या और धर्म किसके लिए हैं?

योग, तपस्या और धर्म का लक्ष्य श्रीकृष्ण ही बताए गए हैं; सभी कर्मों और गतियों की समाप्ति भी उन्हीं में है।

योगतपस्याधर्म
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह तप से बड़ा क्यों है?

कहा गया है कि जो फल तप, योग और समाधि से भी नहीं मिलता, वह भागवत सप्ताह से सहज मिल जाता है।

भागवत सप्ताहतपयोग
श्रीमद्भागवत

क्या हरि कीर्तन से तप और योग का फल मिलता है?

हाँ, कहा गया है कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

हरि कीर्तनतपयोग
लोक

हंस और सोहम का संबंध

हंस मंत्र श्वास का नाद है और सोहम उसका अद्वैत अर्थ है: वह मैं हूँ।

हंससोहमअजपा जाप
लोक

हंस मंत्र क्या है

हंस मंत्र श्वास और आत्मबोध से जुड़ा सोहम भाव का योगिक मंत्र है।

हंस मंत्रसोहमश्वास
लोक

सोहम मंत्र क्या है

सोहम मंत्र का अर्थ है वह परमात्मा मैं ही हूँ।

सोहम मंत्रहंस मंत्रयोग
लोक

केवल कुम्भक क्या है?

केवल कुम्भक स्वाभाविक श्वास-स्थिरता की अवस्था है।

केवल कुम्भकयोगश्वास
लोक

कुम्भक क्या होता है?

कुम्भक श्वास-रोक की योगिक अवस्था है।

कुम्भकयोगश्वास
लोक

मणिपुर चक्र कहाँ होता है?

मणिपुर चक्र नाभि क्षेत्र में माना गया है।

मणिपुर चक्रनाभियोग
लोक

सत्यलोक कैसे जाते हैं?

सत्यलोक जाने के लिए कठोर तपस्या, निष्काम भक्ति और अखंड ब्रह्मचर्य आवश्यक है। मृत्यु के बाद देवयान मार्ग से आत्मा सत्यलोक पहुँचती है।

सत्यलोकयात्रादेवयान
लोक

ऊर्ध्वरेता कौन होते हैं?

ऊर्ध्वरेता वे महान ब्रह्मचारी हैं जिन्होंने जीवन भर वीर्य का संरक्षण कर उसे आध्यात्मिक तेज में बदल लिया। इनकी यही योग्यता उन्हें सत्यलोक का निवासी बनाती है।

ऊर्ध्वरेताब्रह्मचर्यतपस्या
भक्ति एवं आध्यात्म

पिछले जन्म को जानने का कोई तरीका है?

योग के गहरे अभ्यास और समाधि से पूर्वजन्म की झलक मिल सकती है। जन्मजात जातिस्मर व्यक्तियों को यह स्मृति स्वाभाविक होती है। पातंजल योगसूत्र में इसका शास्त्रीय आधार है।

पूर्वजन्मजातिस्मरयोग
योग एवं साधना

सूर्य नमस्कार में कितनी मुद्राएं होती हैं?

सूर्य नमस्कार में 12 मुद्राएँ होती हैं — प्रणामासन से आरंभ होकर पर्वतासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंगासन आदि से होते हुए पुनः प्रणामासन पर समाप्त होती हैं। प्रत्येक मुद्रा के साथ एक सूर्य नाम मंत्र का उच्चारण होता है।

सूर्य नमस्कारयोग12 आसन
ज्योतिष

त्रिपुष्कर योग में शुभ काम

तिथि+वार+नक्षत्र विशेष संयोग = कार्य 3 गुना फल। संपत्ति/निवेश/व्यापार/दान शुभ। ऋण/झगड़ा वर्जित (3 गुना अशुभ भी)। पंचांग में देखें।

त्रिपुष्करयोगशुभ
ज्योतिष

द्विपुष्कर योग में शुभ काम

तिथि+वार+नक्षत्र = कार्य 2 गुना फल। त्रिपुष्कर जैसा, बुध/गुरु/शुक्रवार। संपत्ति/निवेश/दान शुभ। अशुभ = 2 गुना अशुभ।

द्विपुष्करयोगशुभ
मुहूर्त

सर्वार्थ सिद्धि योग कब होता है महत्व

वार+नक्षत्र विशिष्ट संयोग। 'सभी कार्य सफल' — व्यापार, संपत्ति, विवाह, यात्रा, निवेश। अमृत सिद्धि से व्यापक। पंचांग/ऐप में 'सर्वार्थ सिद्धि' देखें।

सर्वार्थ सिद्धियोगशुभ
मुहूर्त

गुरु पुष्य योग में क्या खरीदना शुभ

गुरुवार+पुष्य = सोना, पीली वस्तुएं, शिक्षा सामग्री, पुखराज, धार्मिक सामग्री, संपत्ति। शिक्षा/धर्म = गुरु पुष्य > रवि पुष्य। बृहस्पति=ज्ञान/धन/धर्म।

गुरु पुष्ययोगखरीदारी
मुहूर्त

अमृत सिद्धि योग कब होता है इसमें क्या करें

वार+नक्षत्र संयोग (रवि+हस्त, सोम+मृगशिरा, गुरु+पुष्य आदि)। नया व्यापार, खरीदारी, गृह प्रवेश, पूजा — कोई भी शुभ कार्य। 'अमृत जैसा फल।' पंचांग/ऐप में देखें।

अमृत सिद्धियोगशुभ
हिंदू दर्शन

गीता के 18 अध्यायों का सारांश क्या है

गीता 18 अध्याय = 3 खंड: कर्म (1-6), भक्ति (7-12), ज्ञान (13-18)। मुख्य: अर्जुन का शोक → आत्मा अमर → कर्म करो फल छोड़ो → अवतार → ध्यान → भक्ति → विश्वरूप → गुण-विभाग → अंतिम उपदेश 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' (18.66)।

गीता18 अध्यायसारांश
आत्मा और मोक्ष

मोक्ष प्राप्ति के चार मार्ग कौन से हैं

चार मार्ग: ज्ञान योग (आत्म-ज्ञान — शंकराचार्य), भक्ति योग (ईश्वर समर्पण — गीता 12.6), कर्म योग (निष्काम कर्म — गीता 2.47), राज योग (ध्यान-समाधि — पतंजलि)। ये परस्पर पूरक हैं। गीता 18.66 — भगवान की शरण = सर्वपाप मुक्ति।

मोक्षचार मार्गयोग
मुहूर्त एवं योग

अमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान है

अमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह 'सिद्धि', यह 'अमृत (शाश्वत) फल'।

अमृत सिद्धियोगशुभ मुहूर्त
मुहूर्त एवं योग

सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने से क्या लाभ मिलता है

सर्वार्थ सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र संयोग = सभी कार्य सिद्ध। पूजा = कई गुना फल, मंत्र सिद्धि, मनोकामना पूर्ति। गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, खरीद — सभी शुभ। अन्य दोषों को भी क्षीण करता है। पंचांग में तिथि देखें।

सर्वार्थ सिद्धियोगशुभ मुहूर्त
मंत्र एवं योग

सूर्य नमस्कार मंत्र कौन से हैं और कैसे बोलें

सूर्य नमस्कार में 12 मंत्र: ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः। प्रत्येक मंत्र एक आसन के साथ। फल: आयु, प्रज्ञा, बल, तेज वृद्धि।

सूर्य नमस्कार12 मंत्रयोग

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।